नई दिल्ली, 12 फरवरी। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वस्थ रहने का आसान उपाय योगासन में छुपा है। ये योगासन न केवल तन बल्कि मन को भी भला चंगा रखते हैं। ऐसे ही एक आसन का नाम उत्थित पद्मासन है, जिसके रोजाना थोड़े अभ्यास से कई फायदे मिलते हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उत्थित पद्मासन के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार, योग, अनुशासन और शारीरिक-मानसिक सामर्थ्य का एक शानदार मार्ग है। उत्थित पद्मासन के नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बेहतर होता है, एकाग्रता बढ़ती है और आंतरिक ऊर्जा जागृत होती है।
यह आसन पद्मासन की स्थिति में हाथों के बल पर पूरा शरीर जमीन से ऊपर उठाने वाला एक शक्तिशाली योग मुद्रा है, जो हाथों, कंधों, कोर और पूरे शरीर की ताकत को बढ़ाता है। इस आसन को करने की विधि आसान है।
एक्सपर्ट के अनुसार, इसके लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठ जाएं, जिसमें एक पैर दूसरी जांघ पर और दूसरा पैर पहली जांघ पर रखा जाता है। फिर दोनों हाथों को शरीर के पास जमीन पर रखें, हथेलियां नीचे की ओर। गहरी सांस लेते हुए हाथों पर शरीर का पूरा भार डालें और धीरे-धीरे पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठा लें। इस दौरान गर्दन और सिर को सीधा रखें, नजरें सामने या थोड़ा नीचे की ओर हों। जितना संभव हो उतने समय तक इस मुद्रा में बने रहें और सांस को सामान्य रखें। धीर-धीरे वापस की मुद्रा में आएं।
आयुष मंत्रालय और योग विशेषज्ञों के अनुसार, उत्थित पद्मासन के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। यह हाथों, कलाइयों, कंधों और कोर मसल्स को बहुत मजबूत बनाता है। पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यह आसन संतुलन की क्षमता को बढ़ाता है, दिमाग में एकाग्रता लाता है और तनाव कम करने में मदद करता है।
इसके नियमित अभ्यास से छाती, कंधों और हाथों में रक्त संचार बेहतर होता है, मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और शरीर में प्राण ऊर्जा का संचार सुचारू रूप से होता है। यह योग साधकों के लिए आंतरिक शक्ति जागृत करने का प्रभावी तरीका माना जाता है। उत्थित पद्मासन छात्रों के लिए भी बेहद कारगर है। इसके अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, जो पढ़ाई के लिए बेहद जरूरी है।
हालांकि, घुटने, कूल्हे या कलाई में कोई समस्या हो तो पहले डॉक्टर या योग गुरु से सलाह जरूर लें।