सीएम मोहन यादव बोले: वन उत्पाद से आदिवासी होंगे सशक्त, उज्जैन का महाकाल वन मेला बनेगा समृद्धि का द्वार

मध्य प्रदेश में वन उत्पादों से आदिवासियों का सशक्तीकरण : सीएम मोहन यादव


उज्जैन, 11 फरवरी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वन उत्पादों से आदिवासियों का आर्थिक तौर पर सशक्तिकरण होगा। इसका उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि बाबा श्री महाकाल और मां हरसिद्धि की कृपा से भगवान श्री कृष्ण की शिक्षा स्थली में श्री महाकाल वन मेला 2026 आयोजित किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा वन मेला भोपाल के बाद अब उज्जैन में भी लगाया जा रहा है। सदियों से स्वास्थ्य का आधार रहे हैं वन। वन मेले से वन उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ेगी और हमारे मेहनती और लगनशील आदिवासी भाइयों का आर्थिक सशक्तीकरण भी होगा।

उन्होंने कहा कि वन औषधि हमारे प्राचीन आयुर्वेद और ज्ञान से समृद्ध परंपरा है। श्री महाकाल वन मेला हमारे प्राकृतिक जीवन दर्शन का विस्तार है। यह वन मेला आरोग्य का भव्य उत्सव है। हमारे वन केवल हरियाली ही नहीं बल्कि जीवन को निरोग बनाने वाली दिव्य औषधियों का भंडार हैं। मेले में 50 से अधिक वैद्य भी उपस्थित हैं जो वन मेले में चिकित्सा सुविधा प्रदान करेंगे। मेले में महुआ से बने हुए विभिन्न उच्च गुणवत्ता के उत्पाद भी उपलब्ध हैं।

सीएम मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में वन कभी केवल लकड़ी, ईंधन या संसाधन नहीं रहे बल्कि स्वास्थ्य और संस्कृति के मूल आधार रहे हैं। रामायण का वह प्रसंग, जब युद्ध भूमि में लक्ष्मण मूर्छित हुए और हिमालय के वनों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी ने उन्हें पुनः जीवन प्रदान किया। यह केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन भारत में वन औषधियों का गहन, वैज्ञानिक और व्यवहारिक ज्ञान था।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि से लेकर महर्षि चरक और सुश्रुत तक, हमारे वैद्यों ने वनों में उपलब्ध जड़ी-बूटियों से चिकित्सा पद्धतियां विकसित कीं, जिनकी प्रासंगिकता आज भी विश्व स्वीकार कर रहा है। च्यवन ऋषि का च्यवनप्राश हो या अश्वगंधा, आंवला, हर्रा-बहेरा जैसी औषधियां, ये सब वन की देन हैं, जिन्होंने भारत को आरोग्य की भूमि बनाया। हमारे वन प्राकृतिक औषधालय हैं। नीम, गिलोय, अश्वगंधा, अर्जुन, आंवला, हर्रा और बहेड़ा इन सबमें वह शक्ति है जो मनुष्य को बीमार ही न होने दे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के कठिन समय में दुनिया ने देखा कि आयुर्वेद और आयुष ने कैसे जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। औषधीय गुणों से भरपूर हमारा काढ़ा दुनिया की महंगी से महंगी दवाइयों पर भारी पड़ा। यह कहते हुए गर्व है कि आज वैश्विक समुदाय भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की ओर आशा और विश्वास से देख रहा है। इस दिशा में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आयुष को नई पहचान और वैश्विक मंच मिला है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि वन और वनोपज जैसे विषय, जो कभी सीमित दायरे में माने जाते थे, आज वैश्विक संवाद का केंद्र बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी भाइयों को वन मेले के माध्यम से वन उत्पाद विक्रय करने का प्लेटफार्म भी मिल रहा है। वन मेला जनजातीय समाज के परिश्रम, परंपरागत ज्ञान और आधुनिक बाजार के बीच सेतु बनकर हमारे प्रदेश की पहचान को और सुदृढ़ करता है। श्री महाकाल वन मेला 6 दिवसीय वन मेले में अकाष्ठीय वनोपज, ग्रामीण आजीविका, हर्बल उद्यमिता, संरक्षण, प्रसंस्करण और विपणन सब एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

मेले में लगभग 250 भव्य और आकर्षक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें 76 स्टॉल प्राथमिक लघु वनोपज समितियों और वन धन केंद्रों के हैं। 76 स्टॉल निजी क्षेत्र के उद्यमियों के हैं। 16 स्टॉल विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी के लिए हैं, और 16 स्टॉल वन आधारित फूड जोन के हैं। यहां 50 स्टॉल निःशुल्क आयुर्वेदिक ओपीडी के लिए समर्पित किए गए हैं। इन स्टॉल में 50 आयुर्वेदिक डॉक्टर और 100 पारंपरिक वैद्य सेवाएं देंगे। मेले में दोना-पत्तल निर्माण और सबई रस्सी जैसे उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन हो रहा है। मेले में महुआ फूल, महुआ गुल्ली, साल बीज, अचार गुठली, आंवला, जामुन, बेल फल एवं चकोंडा बीज जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं।
 
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