राहुल गांधी पर बलूनी का तीखा हमला: बजट पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर कर रहे 'नाटकीयता', देश गुमराह

राहुल गांधी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं: अनिल बलूनी


नई दिल्ली, 11 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर विस्तृत पोस्ट शेयर कर राहुल गांधी के बयानों को भ्रामक और वास्तविकता से परे बताया।

लोकसभा सदस्य बलूनी ने कहा कि “तथ्य स्पष्ट रूप से नेता प्रतिपक्ष के मजबूत पक्ष नहीं हैं। राहुल गांधी ने एक बार फिर सच्चाई के बजाय नाटकीयता को चुना है। उन्होंने न सिर्फ बजट की आलोचना की, बल्कि उसे गलत तरीके से उद्धृत किया, गलत पढ़ा और उसी विकृत व्याख्या पर अपनी दलील खड़ी की।”

उन्होंने कहा कि संसद में बहस तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि चुनिंदा अंशों और सुविधाजनक व्याख्याओं पर। बजट को जानबूझकर गलत तरीके से पेश करना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है और देश की जनता की बुद्धिमत्ता का अपमान है।

राहुल गांधी द्वारा यह दावा किए जाने पर कि भारतीय डेटा अमेरिका को बेचा जा रहा है, बलूनी ने इसे “पूरी तरह झूठा और हास्यास्पद” बताया। उन्होंने कहा कि बजट में 2047 तक भारत में डेटा सेंटर स्थापित करने वाली कंपनियों को टैक्स में राहत देने का प्रस्ताव है। इससे डेटा लोकलाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय आईटी कंपनियां पश्चिमी देशों के ग्राहकों को क्लाउड व एआई सेवाएं बेहतर ढंग से दे सकेंगी। उन्होंने कहा, “भारत में अधिक डेटा सेंटर का मतलब है भारतीय कंपनियों के लिए अधिक अवसर और 140 करोड़ भारतीयों का डेटा भारत में ही सुरक्षित रहना।”

राहुल गांधी के इस आरोप पर कि बजट में वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत की सप्लाई चेन को मजबूत करने की कोई योजना नहीं है, बलूनी ने कहा कि यह भी तथ्यहीन है। उन्होंने बताया कि बजट दस्तावेज में रेयर अर्थ, नई सेमीकंडक्टर मिशन योजना, पूरी वैल्यू चेन पर फोकस और ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल व तमिलनाडु से गुजरने वाले कई क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर का प्रस्ताव शामिल है।

राहुल गांधी द्वारा डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने के दावे पर बलूनी ने कहा कि राहुल गांधी ने अमेरिकी सरकार की एक पुरानी फैक्ट शीट का हवाला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते में भारत और अमेरिका के बीच नए डिजिटल नियमों पर बातचीत की बात कही गई है।

कृषि क्षेत्र को खोलने और दालों के आयात की अनुमति देने के आरोप पर उन्होंने कहा कि अद्यतन अमेरिकी फैक्ट शीट में दालों का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत हर साल 2 अरब डॉलर से अधिक की दालें आयात करता है, जो 2023 में 2.6 अरब डॉलर रही। कपास के मामले में भी अमेरिका अकेला आयातक नहीं है; ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया से अधिक मात्रा में कपास आती है, जबकि कुल आयात भारत के उत्पादन का मात्र दसवां हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिका के लिए नहीं खोलेगा। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के दौरान भी यही रुख अपनाया गया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका से भारत के कुल 1.7 अरब डॉलर के कृषि आयात में लगभग 1 अरब डॉलर ‘ट्री नट्स’ का है, जो भारत में बड़े पैमाने पर नहीं उगाए जाते।

राहुल गांधी के इस दावे पर कि भारत पर टैरिफ 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है, बलूनी ने कहा कि यह अधूरा और भ्रामक आकलन है। उन्होंने कहा कि 18 प्रतिशत टैरिफ अंतिम व्यापार समझौते से पहले का है। भारत के लगभग 45 प्रतिशत निर्यात- जैसे फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, रत्न और आभूषण कम या शून्य टैरिफ पर जाएंगे। समझौते के बाद औसत भारित टैरिफ और कम होने की उम्मीद है।

उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी एक पुराने अमेरिकी दस्तावेज का हवाला दे रहे हैं, जिसमें भारत द्वारा 500 अरब डॉलर की खरीद को ‘प्रतिबद्धता’ बताया गया था। अद्यतन दस्तावेज में इसे ‘इरादा’ बताया गया है, जो परिस्थितियों और वार्ताओं पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिबद्धता और इरादे में बड़ा अंतर होता है और पुराने दस्तावेज के आधार पर आरोप लगाना भ्रामक है।

राहुल गांधी द्वारा यह कहे जाने पर कि भारत को अमेरिका से निर्यात के मामले में कोई प्रतिबद्धता नहीं मिली, बलूनी ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2014-15 से भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष 20 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 40.9 अरब डॉलर हो गया है। इसी अवधि में भारत का निर्यात 42.4 अरब डॉलर से बढ़कर 86 अरब डॉलर पहुंच गया। 2022 के बाद इलेक्ट्रॉनिक निर्यात लगभग शून्य से बढ़कर 2025 में 20 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

ऊर्जा सुरक्षा पर समझौता करने के आरोप को भी उन्होंने खारिज किया। उन्होंने कहा कि 2022 में बाइडेन प्रशासन के दबाव के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी और रूस से तेल आयात 0.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2023 में लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता का उदाहरण था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस समय राहुल गांधी की पार्टी ने रूसी तेल आयात का विरोध किया था।

अंत में बलूनी ने कहा कि राहुल गांधी संसद को गुमराह कर रहे हैं और उनके आरोप तथ्यों की कसौटी पर नहीं टिकते। उन्होंने कहा कि संसद में जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका तथ्यों और गंभीर बहस पर आधारित होनी चाहिए, न कि पुराने दस्तावेजों और भ्रामक व्याख्याओं पर।
 

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