कर्नाटक कांग्रेस पर BJP का तीखा प्रहार: 'अर्बन नक्सल' से गठजोड़ कर बनी 'कम्युनिस्ट कांग्रेस अर्बन नक्सलाइट' पार्टी

कर्नाटक कांग्रेस पर ‘अर्बन नक्सल’ से गठजोड़ का आरोप, विपक्ष के नेता नारायणस्वामी का हमला


कोलार, 11 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक कांग्रेस ने लोकतंत्र, संघीय ढांचे और डॉ. बी.आर. आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान की मर्यादाओं के भीतर काम करने के बजाय “अर्बन नक्सल” से खुद को जोड़ लिया है।

विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालवाडी नारायणस्वामी ने कोलार में मीडिया से बातचीत करते हुए यह बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नक्सलवाद की शुरुआत कम्युनिस्टों से हुई थी और इसके लिए जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया। बाद में कांग्रेस को भी जनता ने खारिज कर दिया।

नारायणस्वामी ने कहा कि अर्बन नक्सल से गठजोड़ कर कांग्रेस अब “कम्युनिस्ट कांग्रेस अर्बन नक्सलाइट” पार्टी बन गई है।

उन्होंने कहा कि संघीय व्यवस्था में ग्राम पंचायत से लेकर प्रधानमंत्री तक आपसी सम्मान की संरचना होती है। लेकिन उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री के लिए “कायर” शब्द का इस्तेमाल कर असंवैधानिक तरीके से उनका अपमान किया है।

उन्होंने मंत्री प्रियंक खड़गे की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने भी यही शब्द इस्तेमाल किया और अपने पिता के नाम के बिना वे ग्राम पंचायत का चुनाव भी नहीं जीत सकते।

कोलार को पवित्र भूमि बताते हुए नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि यहीं जन्मे कांग्रेस एमएलसी नसीर अहमद ने भी प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें देशद्रोही तक कहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का इस तरह अपमान करना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कम्युनिस्टों से जुड़ने के बाद कांग्रेस नेताओं के पहनावे और आचरण में बदलाव आया है और वे अब अर्बन नक्सल की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही वीबी-जी राम-जी अधिनियम को मंजूरी दे चुकी है, जिसे उन्होंने ग्रामीण आजीविका को समर्थन देने वाला कानून बताया।

ग्रामीण रोजगार योजनाओं का इतिहास बताते हुए उन्होंने कहा कि समय-समय पर इन योजनाओं के नाम बदले गए—रोजगार योजना से लेकर प्रधानमंत्री रोजगार योजना, ग्रामीण भूमिहीन रोजगार, ग्रामीण रोजगार गारंटी, जवाहर रोजगार योजना, रोजगार आश्वासन योजना, जवाहर ग्राम समृद्धि योजना, संपूर्ण रोजगार योजना, फूड फॉर वर्क, रोजगार गारंटी और अंततः 2009 में महात्मा गांधी का नाम जोड़कर मनरेगा किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इस योजना में बड़े पैमाने पर लूट की गुंजाइश थी और गरीबों के लिए होने वाले कार्य मशीनों से कराए जाते थे। उन्होंने सवाल किया, “क्या मशीनें गरीब हैं?”

नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि गरीबों के नाम पर खाते खोले जाते थे, डेबिट कार्ड दूसरों के पास रखे जाते थे और पैसा जमा होते ही निकाल लिया जाता था, जिससे करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कोलार के श्रीनिवासपुर में लोकायुक्त ने 25 मामले दर्ज किए। वहीं, यादगीर और कलबुर्गी में पुरुषों ने कथित तौर पर साड़ी पहनकर महिलाओं के लिए निर्धारित धनराशि ले ली। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे मामले होने कैसे दिए गए।

उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत पहले 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, जिसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। “इससे आपको परेशानी क्यों होनी चाहिए?” उन्होंने सवाल किया। पहले भुगतान तीन या छह महीने में होता था, जबकि अब सात से 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि इससे किसे आपत्ति हो सकती है।
 

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