पूर्व पीएम देवगौड़ा ने बजट को सराहा, बोले - रोजगार, किसानों और समावेशी विकास पर ज्यादा ध्यान दें सरकार

पूर्व पीएम देवगौड़ा ने बजट को सराहा; रोजगार, किसानों और समावेशी विकास पर जोर


नई दिल्ली, 11 फरवरी। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) सांसद एच.डी. देवगौड़ा ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय बजट 2026-27 का समर्थन किया। उन्होंने बजट की तारीफ करते हुए रोजगार, समावेशी विकास और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

देवगौड़ा ने कहा कि बजट में आर्थिक सुधारों, कर प्रणाली के सरलीकरण और वैश्विक चुनौतियों के बीच विकास को बनाए रखने के लिए संरचनात्मक बदलावों पर जोर दिया गया है, जो सकारात्मक कदम है। हालांकि, उन्होंने चेताया कि केवल आर्थिक वृद्धि पर्याप्त नहीं है, जब तक कि रोजगार नीति का केंद्रीय मुद्दा न बने।

उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र और एमएसएमई तभी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकते हैं, जब उन्हें मजबूत स्किलिंग कार्यक्रम, स्थानीय सहयोगी तंत्र, सस्ता ऋण और पूर्वानुमेय नियामकीय व्यवस्था का समर्थन मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि सफलता का आकलन केवल निवेश घोषणाओं से होना चाहिए या फिर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के वास्तविक सृजन से।

कराधान के मुद्दे पर देवगौड़ा ने प्रणाली को सरल बनाने के प्रयासों का स्वागत किया, लेकिन साथ ही करदाताओं के विश्वास को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नकदी प्रवाह या पहले से निपटाए गए मामलों को प्रभावित करने वाले किसी भी बदलाव के साथ पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए, ताकि ईमानदार करदाता आश्वस्त महसूस करें।

पूर्व प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी और प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर से आगे बढ़कर देश के अन्य शहरों और जिलों पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति पूरे देश में संतुलित क्षेत्रीय विकास से ही संभव है। इसके लिए शहरी प्रशासन, जल सुरक्षा, जलवायु सहनशीलता और संतुलित क्षेत्रीय विकास को मजबूत करने पर जोर दिया जाना चाहिए।

किसानों की मदद के लिए देवगौड़ा ने कटहल, इमली और जामुन के लिए एक राष्ट्रीय बोर्ड बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ये फसलें कम पानी में भी उगाई जा सकती हैं, विभिन्न परिस्थितियों में टिकाऊ हैं और बाजार में इनकी मांग बढ़ रही है। एक समर्पित बोर्ड के माध्यम से इनकी खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है, मूल्य संवर्धन किया जा सकता है और जल संकट झेल रहे क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।

अपने समापन वक्तव्य में देवगौड़ा ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ केवल नारा नहीं, बल्कि गंभीर जिम्मेदारी है। इसके लिए आलोचना के प्रति खुलेपन, आवश्यकतानुसार सुधार करने की तत्परता और समावेशी, टिकाऊ तथा न्यायपूर्ण विकास के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत के पास प्रतिभा, उद्यम और महत्वाकांक्षा है, जो उसे वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा सकती है। देवगौड़ा ने आशा व्यक्त की कि यह बजट केवल आंकड़ों के लिए नहीं, बल्कि मजबूत वर्तमान और बेहतर भविष्य गढ़ने की दूरदृष्टि के लिए याद किया जाएगा।
 

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