चकबंदी में 'उड़ान चक' घोटाला: यूपी में सहायक अधिकारी निलंबित, पीड़ितों को न्याय की आस

उत्तर प्रदेश: चकबंदी में गंभीर अनियमितता पर कार्रवाई, सहायक चकबंदी अधिकारी निलंबित


लखनऊ, 10 फरवरी। उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने गंभीर आरोपों के तहत संतकबीरनगर में तैनात सहायक चकबंदी अधिकारी रामदरश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह कार्रवाई चकबंदी के दौरान नियमों की अनदेखी और पीड़ित परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोपों के आधार पर की गई है।

जानकारी के अनुसार जनपद संतकबीरनगर की तहसील धनघटा अंतर्गत ग्राम संठी में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। मृतक प्रभुनाथ प्रजापति के परिजनों के मूल गाटा नंबरों को नियम विरुद्ध तरीके से परिवर्तित कर ‘उड़ान चक’ प्रदर्शित किए गए। इसके साथ ही, नियमानुसार समयबद्ध आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया, जिससे पीड़ित परिवार को लंबे समय तक मानसिक और प्रशासनिक परेशानी झेलनी पड़ी।

इस प्रकरण में जांच के दौरान यह भी सामने आया कि चकबंदी कार्य में लापरवाही और मिलीभगत की भूमिका रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित लेखपाल को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि अब सहायक चकबंदी अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है और किसी भी स्तर पर अनियमितता करने वाले कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने फील्ड में तैनात सभी चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे नियमों का पूर्णतः पालन करते हुए कार्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपूर्ण, पारदर्शी और जनहित में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई चकबंदी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
 

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