तुर्किए में उइगरों पर मंडराया जबरन वापसी का खतरा! क्या खत्म हो रहा है उनका आखिरी आसरा

तुर्किए में निर्वासित उइगरों में बढ़ता डर, जबरन निर्वासन की आशंका गहराई


अंकारा, 10 फरवरी। तुर्किए में शरण लिए हुए लगभग 50 हजार उइगरों में डर का माहौल गहराता जा रहा है। उत्तर-पश्चिमी चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से बचकर आए उइगर, खासकर वे लोग जिन्हें तुर्किए सरकार ने अब तक स्थायी नागरिकता और पासपोर्ट नहीं दिया है, अब किसी भी वक्त चीन वापस भेजे जाने की आशंका में जी रहे हैं। उन्हें डर है कि यदि उन्हें वापस भेजा गया तो उन्हें जेल, यातना और बीजिंग सरकार के कहर का सामना करना पड़ेगा।

ऑनलाइन पत्रिका ‘बिटर विंटर’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों तक चीनी दमन से भागे उइगरों के लिए भरोसेमंद शरणस्थली माने जाने वाला तुर्किए अब सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा। रिपोर्ट में मनमानी गिरफ्तारियों, निर्वासन की धमकियों और बेबुनियाद आतंकवाद के आरोपों की बढ़ती घटनाओं का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट ‘प्रोटेक्टेड नो मोर: उइगर इन टर्की’ (लेखक: यालकुन उलुयोल) का हवाला देते हुए कहा गया है कि तुर्किए की दोहरी नीति उजागर हो चुकी है। निष्कर्ष बताते हैं कि जिन उइगरों के पास तुर्किए की नागरिकता नहीं है, उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं रह गई है। महिलाओं और बच्चों तक की बार-बार की जा रही धरपकड़ इसकी पुष्टि करती है।

रिपोर्ट के अनुसार, निर्वासित उइगर शिक्षाविद अब्दुवेली अयुप ने इस्तांबुल की आतंकवाद निरोधक पुलिस द्वारा 31 उइगरों को हिरासत में लिए जाने का खुलासा किया। ये उइगर कथित तौर पर नए साल से पहले आईएसआईएस संदिग्धों के खिलाफ चलाए गए बड़े अभियान के दौरान पकड़े गए थे। इनमें से अधिकांश पिछले दस वर्षों से अधिक समय से तुर्किए में रह रहे थे और रोजगार में थे। उन्हें 24-25 दिसंबर 2025 को हिरासत में लिया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठनों के विरोध के बाद बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।

इसी अभियान के दौरान एक उइगर महिला और उसके एक महीने के नवजात शिशु को भी हिरासत में लिया गया। स्वास्थ्य कारणों से महिला के तीन अन्य बच्चों को घर भेज दिया गया, जबकि मुएयस्सर अली और उनके बेटे एनिस अब्दुल्ला को इज़मिर डिपोर्टेशन सेंटर भेज दिया गया था, जहां उन्हें जबरन चीन भेजे जाने का डर सता रहा था। कानूनी लड़ाई और सार्वजनिक दबाव के बाद एक सप्ताह में दोनों को रिहा कर दिया गया। इस मामले में भी न तो कोई आरोप लगाए गए और न ही गिरफ्तारी का कारण बताया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तुर्किए में रह रहे उइगरों पर चीनी सरकार का दबाव लगातार बना हुआ है। बीजिंग, चीन के दूतावासों और कांसुलेट्स जैसे सरकारी माध्यमों के जरिए उइगरों को अपने ही समुदाय के लोगों के बारे में जानकारी देने के लिए मजबूर करता है, इसके लिए उनके चीन में रह रहे परिजनों पर दबाव डाला जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कई उइगर अपने वतन और परिवार से बिछड़ने का गम झेलते हुए तुर्किए में नई जिंदगी बसाने की कोशिश कर चुके हैं। उनके बच्चे स्कूलों में पढ़ रहे हैं, कई लोगों ने घर खरीदे हैं, नई भाषा सीखी है और नए करियर की शुरुआत की है।
 

Latest Replies

Forum statistics

Threads
5,688
Messages
5,720
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top