एनपीजी के जरिए अब तक 16.10 लाख करोड़ रुपए के 352 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन हुआ : केंद्र

एनपीजी के जरिए अब तक 16.10 लाख करोड़ रुपए के 352 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन हुआ : केंद्र


नई दिल्ली, 10 फरवरी। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) सिस्टम के माध्यम से अब तक कुल 16.10 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 352 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया जा चुका है।

लोकसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इन 352 प्रोजेक्ट्स में से 201 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है और इनमें से 167 प्रोजेक्ट्स कार्यान्वयन के अधीन हैं।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) के अंतर्गत गठित नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करता है ताकि योजना चरण में ही एकीकृत योजना, बहुआयामी कार्यप्रणाली, अंतर-आयामी कार्यप्रणाली, प्रयासों का समन्वय, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, परियोजना स्थल और उसके आसपास व्यापक विकास, डेटा-आधारित निर्णय लेने को सुनिश्चित किया जा सके।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने राज्यों को इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 50 वर्षों के ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 5,000 करोड़ रुपए वितरित करने का प्रावधान किया है।

प्रसाद के अनुसार, केंद्रीय क्षेत्र के चल रहे प्रोजेक्ट्स, जिनमें प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत नियोजित और मूल्यांकित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनकी लागत 150 करोड़ रुपए या उससे अधिक है, के कार्यान्वयन की निगरानी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा की जाती है।

इसके अतिरिक्त, प्रोजेक्ट्स की चरणबद्ध निगरानी करने, मुद्दों के त्वरित समाधान और 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक की अनुमानित लागत वाली बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में तेजी लाने के उद्देश्य से परियोजना निगरानी समूह (पीएमजी) का गठन किया गया है।

पीएमजी ने एक अद्वितीय पंचस्तरीय समाधान प्रणाली लागू की है, जो यह सुनिश्चित करती है कि मुद्दों का समाधान उचित स्तर पर हो। सामान्य मुद्दों के लिए संबंधित मंत्रालय से शुरुआत होती है और जटिल मुद्दों के लिए प्रगति (सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन) मंच तक बात पहुंचती है।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यह दृष्टिकोण समीक्षा तंत्र को सुव्यवस्थित करता है, दोहराव को रोकता है और उच्च अधिकारियों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने आगे कहा कि परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करने और समय पर उनका समापन सुनिश्चित करने के लिए, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को पीएमजी के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं और नियामक बाधाओं का समाधान तेजी से हुआ है।
 

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