चंडीगढ़, 10 फरवरी। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) की प्रमुख नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंगलवार को प्रोफेसर देवेंदरपाल सिंह भुल्लर की समय से पहले रिहाई को लेकर गहरी चिंता जताई।
हरसिमरत कौर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करके दिल्ली सरकार की सेंटेंस रिव्यू कमेटी (एसआरबी) पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और अब दिल्ली सरकार बार-बार उनकी मानवीय आधार पर रिहाई की अर्जी खारिज कर रही है, जो बहुत चौंकाने वाली बात है।
हरसिमरत कौर बादल ने लिखा, "यह बहुत चौंकाने वाली बात है कि प्रोफेसर देवेंदरपाल सिंह भुल्लर की मानवीय आधार पर समय से पहले रिहाई की अर्जी को पहले आम आदमी पार्टी सरकार और अब दिल्ली सरकार बार-बार खारिज कर रही है। प्रोफेसर भुल्लर, जो तीस साल से जेल में हैं, कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों से जूझ रहे हैं और इस राहत के हकदार हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, "दिल्ली सरकार की सेंटेंस रिव्यू कमेटी को उनके मामले की फिर से जांच करनी चाहिए और प्रोफेसर भुल्लर की सेहत और इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सही फैसला लेना चाहिए।"
प्रोफेसर देवेंदरपाल सिंह भुल्लर को 1993 के दिल्ली बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी। भुल्लर को टीएडीए कोर्ट द्वारा मौत की सजा दी गई थी, लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने मर्सी पिटीशन पर फैसले में अत्यधिक देरी और उनकी गंभीर मानसिक बीमारी के कारण उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देरी और मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए मौत की सजा उचित नहीं है। भुल्लर 1995 से जेल में हैं और वर्तमान में अमृतसर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
उनकी समय से पहले रिहाई की अर्जियां दिल्ली की सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (एसआरबी) द्वारा कई बार खारिज की गई हैं। दिसंबर 2023 की बैठक में दिल्ली सरकार ने उनकी रिहाई की सिफारिश की थी, लेकिन बोर्ड ने इसे अस्वीकार कर दिया।