दर्दनाक! पाकिस्तान में पोलियो टीम पर अपनों का ही हमला, बच्चों को दवा पिलाने से रोका, पुलिस पर भी वार

polio team attacked by Family of kids


इस्लामाबाद, 10 फरवरी। पाकिस्तान सरकार का पोलियो उन्मूलन अभियान कई कारणों से अपने मकसद में कामयाब होता नहीं दिख रहा है। आए दिन टीम कर्मियों पर हमला किया जाता है और कइयों को तो जान से ही जाना पड़ता है। इस बीच लाहौर से खबर आई है कि यहां अलग-अलग इलाकों में दो पोलियो टीमों पर बच्चों के माता-पिता ने ही हमला कर दिया।

मंगलवार को स्थानीय मीडिया ने इसकी जानकारी दी। जाने-माने अखबार डॉन ने पुलिस के हवाले से बताया कि हरबंसपुरा इलाके में कुछ लोगों ने पोलियो टीम को ड्रॉप्स नहीं पिलाने दीं और फिर कथित तौर पर हेल्थ वर्कर्स पर हमला कर दिया।

एफआईआर के मुताबिक, संदिग्धों ने पोलियो कर्मियों पर हमला किया और बाद में अपने साथियों को बुला लिया, जिन्होंने इन्हें काफी तंग किया। पीड़ित कर्मियों के हेल्पलाइन पर डायल करने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

इसके बाद उग्र परिजनों ने पुलिस वालों पर भी हमला किया। बाद में, पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया।

इसी तरह, शाहदरा पुलिस ने कुछ बच्चों के माता-पिता के खिलाफ कथित तौर पर महिला पोलियो कर्मी को परेशान करने का केस दर्ज किया, जो बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए इलाके में आई थीं।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के सिर्फ दो ऐसे देश हैं जहां वाइल्ड पोलियोवायरस अभी भी अपनी जड़े जमाए हुए है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांत में पोलियो वर्कर्स पर अक्सर हमले होते रहे हैं।

स्थानीय मीडिया ने सोमवार को बताया कि 2026 में पाकिस्तान में चलाए गए पहले पोलियो अभियान के दौरान करीब दस लाख बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी और 53,000 बच्चों ने वैक्सीन नहीं लगवाई। कैंपेन के दौरान, सबसे ज्यादा पोलियो ड्रॉप्स की खपत कराची में हुई। यहां 58 प्रतिशत बच्चों को डोज दी गई।

पाकिस्तान में 4.43 करोड़ से ज्यादा बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई गईं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक इस कैंपेन से दो प्रतिशत बच्चे छूटे। हालांकि, पाकिस्तान की आबादी को देखते हुए, जिन बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स नहीं मिलीं, उनकी संख्या अभी भी बहुत ज्यादा है।

एक अधिकारी ने इसकी वजह भी बताई है। उसके अनुसार, "सुरक्षा की दिक्कतों, सामुदायिक बहिष्कार और बर्फीले इलाकों की वजह से 2,33,000 बच्चे इससे महरूम रहे।"

उन्होंने बताया कि कुल बचे हुए बच्चों में खैबर पख्तूनख्वा के 1,84,000 बच्चे और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान (पीओजीबी) के करीब 50,000 बच्चे बर्फीले इलाकों और कैंपेन न चलाए जाने की वजह से पहुंच से बाहर रह गए।
 

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