नई दिल्ली, 10 फरवरी। नई दिल्ली में भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने पूरे देश में एसआईआर को लेकर जानबूझकर एक झूठा और भ्रामक माहौल बनाने की कोशिश की। विपक्ष ने यह नैरेटिव फैलाया कि एसआईआर फर्जी है, यह चुनावी प्रक्रिया की शुचिता के लिए नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, और यह पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है।
संबित पात्रा ने कहा कि इस नैरेटिव को सबसे ज्यादा हवा खुद सीएम ममता बनर्जी ने दी। उन्होंने बताया कि सीएम ममता बनर्जी इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गईं और स्वयं याचिकाकर्ता बनकर अदालत में पेश हुईं। ममता बनर्जी का दावा था कि एसआईआर के जरिए बंगाल पर अत्याचार हो रहा है और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा था कि चुनाव से जुड़े अधिकारियों की नियुक्तियां गैरकानूनी हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया, वह ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर एसआईआर को लेकर किसी तरह के स्पष्टीकरण की जरूरत होगी तो वह स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट देगा, लेकिन एसआईआर को गलत, गैरकानूनी या अलोकतांत्रिक कहना सही नहीं है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा। संबित पात्रा ने इसे 'झटका नंबर एक' बताते हुए कहा कि ममता बनर्जी शुरू से ही एसआईआर नहीं चाहती थीं।
दूसरे बड़े मुद्दे के तौर पर उन्होंने माइक्रो ऑब्जर्वर्स और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ईआरओ) की नियुक्ति का जिक्र किया। संबित पात्रा ने कहा कि ममता बनर्जी लगातार यह दावा कर रही थीं कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त अधिकारी नहीं हैं, इसलिए वह इन पदों के लिए अधिकारियों की तैनाती नहीं कर सकतीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि उसी दिन शाम 5 बजे तक 8,505 ग्रुप-बी अधिकारी अपने-अपने जिला मजिस्ट्रेट के पास रिपोर्ट करें और ड्यूटी जॉइन करें। उन्होंने कहा कि इसका मतलब साफ है कि अब ममता बनर्जी सरकार को अधिकारियों की सूची सौंपनी पड़ रही है और हजारों अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है।
संबित पात्रा ने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि इन अधिकारियों को राजनीतिक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। राज्य सरकार उन्हें किसी तरह से भड़काने या दबाव डालने की कोशिश न करे। इन सभी प्रक्रियाओं पर चुनाव आयोग नजर रखेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि माइक्रो ऑब्जर्वर्स केवल सहायक भूमिका में रहेंगे और ईआरओ के साथ मिलकर काम करेंगे।
चौथा और बेहद अहम मुद्दा फॉर्म नंबर 7 से जुड़ा हुआ है। संबित पात्रा ने कहा कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल आपत्तियों के लिए किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई मामलों में ऐसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं, जहां पिता की उम्र 24-25 साल और बेटे की उम्र 15-17 साल दर्ज थी। कहीं 5-6 साल में पिता बनने और 10 साल में पांच बच्चों के पिता बनने जैसे असंभव आंकड़े सामने आए। इन गड़बड़ियों के खिलाफ जागरूक नागरिकों ने फॉर्म 7 के जरिए आपत्तियां दर्ज कराईं।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सीएम ममता बनर्जी ने अपने नेताओं को बुलाकर फॉर्म 7 जलाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने चाकुलिया की घटना और उससे जुड़े वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि वहां फॉर्म 7 जलाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया और सख्त निर्देश दिए कि फॉर्म 7 की सुनवाई कानून के मुताबिक की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि अगर शिकायतकर्ता खुद सुनवाई में मौजूद न हो, तब भी उस शिकायत पत्र का महत्व बना रहेगा और सुनवाई करनी ही होगी।
संबित पात्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजी पुलिस को भी कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि डीजी पुलिस हिंसा रोकने में नाकाम रहे हैं और उन्हें शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। डीजी पुलिस को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि वे हिंसा रोकने में क्यों असफल रहे। संबित पात्रा ने कहा कि यह सिर्फ डीजी पुलिस को नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सीएम ममता बनर्जी को चेतावनी है। अदालत ने साफ कहा कि फॉर्म 7 जलाए नहीं जा सकते, चुनाव से जुड़े अधिकारियों को धमकाया, मारा या डराया नहीं जा सकता। अधिकारियों का जीवन महत्वपूर्ण है और उनकी सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
संबित पात्रा ने संसद के हालात पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सदन और सदन के बाहर जो घमासान मचा हुआ है, वह कोई नई बात नहीं है। भाजपा-एनडीए के सत्ता में आने के बाद से ही विपक्ष जानबूझकर देश में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जॉर्ज सोरोस के इशारों पर राहुल गांधी, कांग्रेस और उनके सहयोगी दल लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं (जैसे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, लोकसभा स्पीकर और प्रधानमंत्री) पर हमले कर रहे हैं।