लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: विपक्ष की बड़ी गलती, 2026 की जगह 2025 लिखा; फिर हुई किरकिरी

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में तकनीकी खामी, विपक्ष की किरकिरी


नई दिल्ली, 10 फरवरी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की विपक्ष की कोशिश उस समय अटक गई, जब प्रस्ताव के नोटिस में तकनीकी खामियां पाई गईं। नोटिस में वर्ष 2026 की जगह बार-बार 2025 लिखा गया था, जिसे गंभीर प्रक्रियागत चूक माना गया। इसके बाद कांग्रेस को संशोधित नोटिस के साथ प्रस्ताव दोबारा जमा करना पड़ा।

प्रक्रियागत नियमों के अनुसार, ऐसे किसी भी प्रस्ताव में सभी जानकारियों का सटीक और तथ्यात्मक रूप से सही होना अनिवार्य होता है। साल की गलती सामने आने के बाद नोटिस को स्वीकार नहीं किया गया, जिससे विपक्ष को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ लाए गए एक प्रस्ताव को भी तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया था। उस समय उनके उपनाम की वर्तनी में गलती पाई गई थी। लगातार हो रही ऐसी चूकों ने विपक्ष की रणनीति और तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन पक्षपातपूर्ण तरीके से कर रहे हैं। हालांकि, संख्या बल को देखते हुए इस अविश्वास प्रस्ताव को प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसके पारित होने की संभावना बेहद कम है।

तकनीकी गलती के चलते कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को राजनीतिक रूप से शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकार और विपक्ष के बीच टकराव अपने चरम पर है और विपक्ष लगातार अध्यक्ष पर सदन को “एकतरफा तरीके से” चलाने का आरोप लगा रहा है।

मंगलवार को विपक्षी दलों ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि यह नोटिस दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर लोकसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 94सी के तहत औपचारिक रूप से जमा किया गया।

कांग्रेस के अनुसार, इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम समेत कई दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने अब तक इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार उन्हें सदन में जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर नहीं दिया, जिसके चलते उन्हें अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
 

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