सरकार का फरमान: राहत कोषों पर संसद में सवाल नहीं! जॉन ब्रिटास ने स्पीकर को लिखी चिट्ठी

पीएम केयर्स और पीएमएनआरएफ पर सवाल न पूछने की रिपोर्ट्स को लेकर जॉन ब्रिटास ने स्पीकर को लिखा पत्र


नई दिल्‍ली, 10 फरवरी। पीएम केयर्स फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) और इसी तरह के अन्य रिलीफ फंड से जुड़े सवालों को संसद में न उठाए जाने को लेकर उठी मीडिया रिपोर्ट्स के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार ने लोकसभा सचिवालय को यह जानकारी दी है कि ऐसे फंड से संबंधित प्रश्नों को संसद में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में सीपीआई (एम) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमैन को पत्र लिखकर इस तरह के किसी भी एग्जीक्यूटिव कम्युनिकेशन को तत्काल खारिज करने की मांग की है।

डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में कहा कि सरकार का यह कथित रुख न तो कानून के अनुरूप है और न ही उसके अपने पूर्ववर्ती कानूनी कार्यों के अनुरूप। उन्होंने 28 मार्च 2020 को कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पीएम केयर्स फंड में दिया गया योगदान कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) खर्च के लिए पात्र है, क्योंकि यह फंड सार्वजनिक राहत के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किया गया है। उनके अनुसार, जो फंड सार्वजनिक राहत के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया हो, जिसे कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत सीएसआर योगदान प्राप्त करने की अनुमति हो और जिसने सार्वजनिक व कॉरपोरेट स्रोतों से हजारों करोड़ रुपए जुटाए हों, उसे यह कहकर संसदीय जांच से अलग नहीं रखा जा सकता कि वह 'भारत सरकार की चिंता का विषय नहीं है।'

उन्होंने आगे बताया कि बाद में केंद्र सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन कर पीएम केयर्स फंड को अनुसूची VII में स्पष्ट रूप से शामिल किया, जिससे इसे सीएसआर उद्देश्यों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के समान कानूनी दर्जा प्राप्त हुआ। डॉ. ब्रिटास का तर्क है कि किसी केंद्रीय कानून में इस तरह से पीएम केयर्स को शामिल किया जाना इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है कि यह एक निजी फंड है, जिसका भारत सरकार से कोई संबंध नहीं है।

सांसद ने इस बात पर भी जोर दिया कि पीएम केयर्स और पीएमएनआरएफ जैसे फंड, जिन्हें संसदीय कानूनों के तहत मान्यता प्राप्त है और जो सार्वजनिक हित के लिए बनाए गए हैं, उन्हें संसदीय निगरानी से बाहर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे फंड से जुड़े सवालों को रोकने की कोई भी कोशिश संसदीय निगरानी और लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर करने के समान होगी।

डॉ. ब्रिटास ने यह भी रेखांकित किया कि संसदीय प्रश्न वह प्रमुख माध्यम हैं, जिनके जरिए विधायिका कार्यपालिका को जवाबदेह ठहराती है। ऐसे फंड, जो सार्वजनिक दायरे में काम करते हैं, जिन्हें आधिकारिक संरक्षण प्राप्त है और जो अपने सरकारी जुड़ाव के आधार पर जनता का विश्वास हासिल करते हैं, उन्हें जांच से बाहर रखना पारदर्शिता से रहित एक ऐसा क्षेत्र बनाने जैसा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

जॉन ब्रिटास ने लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन से आग्रह किया है कि पारदर्शिता, संवैधानिक अधिकारों और विधायी मर्यादा के हित में पीएम केयर्स, पीएमएनआरएफ और इसी तरह के अन्य रिलीफ फंड से जुड़े प्रासंगिक और उचित सवालों को स्वीकार करने तथा उन पर विचार करने के संसद के अधिकार को सुरक्षित रखा जाए।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top