सावधान! क्रेडिट कार्ड लिमिट के झांसे में CA से ठगे 75 हजार, दिल्ली पुलिस ने 4 साइबर ठग दबोचे

दिल्ली पुलिस ने पकड़े चार साइबर ठग, महिला के क्रेडिट कार्ड से 75,694 रुपये की ठगी


नई दिल्ली, 10 फरवरी। दिल्ली के शाहदरा साइबर पुलिस ने एक सुनियोजित क्रेडिट कार्ड ठगी के मामले को सुलझाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह धोखाधड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट सोनम चौहान के साथ हुई, जो कृष्णा नगर, शाहदरा की रहने वाली हैं। आरोपियों ने कोटक महिंद्रा बैंक के नाम पर फर्जी तरीके से उनके क्रेडिट कार्ड से 75,694 रुपए की ठगी की।

मामला तब सामने आया जब एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को बैंक एजेंट बताकर महिला से संपर्क किया। उसने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का बहाना बनाकर व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी। महिला ने फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल कर ली, जिसके बाद उनके फोन में अनधिकृत छेड़छाड़ हुई। बिना उनकी जानकारी या सहमति के कार्ड से रकम डेबिट कर ली गई। इसकी शिकायत पर 4 फरवरी 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। एसआई रितु डांगी की अगुवाई वाली टीम में एएसआई राहुल चौधरी, हवलदार दीपक कुमार, महिपाल और रजनी चौधरी शामिल थे। टीम को एसएचओ साइबर इंस्पेक्टर विजय कुमार ने लीड किया, जबकि एसीपी ऑपरेशंस मोहिंदर सिंह की निगरानी में काम हुआ। जांच में पता चला कि ठगी की रकम से फरीदाबाद के चार्मवुड विलेज में इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य चीजें खरीदी गई थीं। जेप्टो ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से हुए लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया गया और लाभार्थी की जानकारी प्राप्त हुई।

सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके के लक्कड़पुर गांव से हुई। आगे जांच में खुलासा हुआ कि ठगी में इस्तेमाल अधिकांश सिम कार्ड एक पीओएस सेंटर से एक्टिवेट किए गए थे। पीओएस ऑपरेटर ने बताया कि अभिषेक कुमार झा ने सिम एक्टिवेट करवाया था, जिसे बाद में आशीष कुमार ओझा और विवेक कुमार उर्फ मोनू को सौंप दिया गया। आशीष कुमार ओझा पहले क्रेडिट कार्ड सेल्स कंपनी में काम करता था, इसलिए उसके पास ग्राहकों का गोपनीय डेटा उपलब्ध था। उसने यह डेटा विवेक कुमार के साथ साझा किया। विवेक ने बैंक ऐप जैसी दिखने वाली खतरनाक एपीके फाइल तैयार की, जिसे बैंक अधिकारी बनकर पीड़ितों को व्हाट्सएप पर भेजा जाता था।

इकरार नामक आरोपी से ठगी में इस्तेमाल मुख्य डिवाइस भी बरामद हुई। गिरफ्तारी के बाद चार मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें मुख्य डिवाइस शामिल थी।

आरोपियों का तरीका काफी चालाकी भरा था। आशीष कुमार ओझा ने पुराने अनुभव का फायदा उठाकर ग्राहक डेटा का दुरुपयोग किया। फर्जी सिम से अपनी पहचान छिपाई गई। विवेक कुमार ने मैलिशियस एपीके बनाई, जो इंस्टॉल होते ही फोन और कार्ड डिटेल्स चुरा लेती थी। इन डिटेल्स से ऑनलाइन खरीदारी की जाती, सामान फरीदाबाद या संबंधित जगहों पर डिलीवर करवाया जाता और फिर ओएलएक्स जैसे प्लेटफॉर्म या ऑफलाइन बेचकर अवैध कमाई की जाती।

गिरफ्तार आरोपियों में अभिषेक कुमार झा, आशीष कुमार ओझा, विवेक कुमार उर्फ मोनू, और इकरार शामिल हैं।

शाहदरा जिला पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, एपीके फाइल कभी डाउनलोड न करें, और बैंक से जुड़ी कोई व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, या गूगल फॉर्म पर शेयर न करें। बैंक अधिकारी होने का दावा करने वाले कॉल की असलियत हमेशा जांचें।
 

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