नई दिल्ली, 10 फरवरी। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर मुस्लिम जनसंख्या का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में देश में मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो चिंताजनक विषय है।
उन्होंने बताया, "कुछ समय पहले एक मुस्लिम नेता ने कहा था कि 'हम दो, हमारे तीन से काम नहीं चलेगा। इसके बजाए मुसलमान हम दो हमारे दो दर्जन पर चलें और जब तक अल्लाह देता रहे, लेते रहो।' मुस्लिम नेता ने ये भी कहा कि उनके आठ बच्चे हैं, भाई के 16 और उनकी 97 साल की मां के 72 पोते-पोती जवान हो चुके हैं। इस बयान ने कट्टरपंथी जमात में जनसंख्या जिहाद के विचार को फिर से उकसा दिया।"
बंसल ने कहा कि यह बयान उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया हो सकता है, लेकिन इसके कुछ महत्वपूर्ण देशव्यापी पहलू हैं। उन्होंने आंकड़े पेश किए कि पिछले छह दशकों (1951-2011) में भारत की कुल जनसंख्या तीन गुना बढ़कर 36 करोड़ से 120 करोड़ हो गई। वहीं, मुस्लिम जनसंख्या पांच गुना बढ़कर 3.4 करोड़ से 17.02 करोड़ तक पहुंच गई। इस दौरान मुस्लिम आबादी का हिस्सा 9.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.2 प्रतिशत हो गया, जबकि हिंदू आबादी 84.1 प्रतिशत से घटकर 79.8 प्रतिशत रह गई। देश के सीमांत 200 जिलों और 300 तहसीलों में बड़े जनसांख्यिकीय बदलाव हुए हैं। 116 गांवों में मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत बढ़ गई और 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक बन गए।
बंसल ने इसे हिंदू विरोधी हिंसक हमलों, लव जिहाद, धर्मांतरण, अवैध घुसपैठ और जनसंख्या जिहाद के कट्टरपंथियों की साजिशों का नतीजा बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस जैसी सरकारों की नीतियों ने भी इस गिरावट में योगदान दिया।
इस स्थिति को देखते हुए, बंसल ने हिंदू समाज के लिए कुछ सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को समय पर शादी के लिए प्रेरित करना जरूरी है, खासकर 19 से 25 साल के बीच के लोग। इसके अलावा, परिवार को कम से कम तीन बच्चों तक बढ़ाने पर जोर देना चाहिए ताकि देश में युवा और बुजुर्ग जनसंख्या में संतुलन बना रहे और भारत को किसी बाहरी या कट्टरपंथी साजिश का शिकार न बनाया जा सके।
साथ ही, बंसल ने मुस्लिम महिलाओं को भी सतर्क रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि बुर्का, हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं के जरिए महिलाओं को सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन बनाने की कोशिश की जा रही है। भारत की बेटियां आज फाइटर प्लेन उड़ाने लगी हैं, लेकिन कुछ कट्टरपंथी उन्हें 16वीं सदी जैसी मानसिकता में सीमित रखना चाहते हैं। इसलिए महिलाओं को अपने अधिकारों और आजादी के लिए जागरूक रहना जरूरी है।