नई दिल्ली, 10 फरवरी। दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की 30,000 करोड़ की संपत्ति और फैमिली बिजनेस से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। इस मामले में संजय कपूर की मां, रानी कपूर ने याचिका दायर की थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को शांति और समझदारी के साथ समाधान निकालने की सलाह दी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ये जो संपत्ति और बिजनेस है, ये दूसरों की मेहनत का फल है और आपके लिए आशीर्वाद हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इसे आशीर्वाद की तरह ही लें, इसे अपने लिए अभिशाप मत बनने दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिवार के रिश्तों का सम्मान करने की कोशिश करें और इस विवाद को शांति से सुलझाने की कोशिश करें।
दिल्ली हाई कोर्ट ने रानी कपूर के फैमिली ट्रस्ट से जुड़ी इस याचिका पर मध्यस्थता यानी मामले को बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाने का सुझाव दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि सीधे झगड़े या लड़ाई से चीजें और बिगड़ सकती हैं, इसलिए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि संजय कपूर की पूर्व पत्नी प्रिया कपूर ने आवेदन दायर किया था, जिसमें उन्होंने अपनी सास रानी कपूर की याचिका को खारिज करने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर सभी पक्षों को जवाब देने का मौका दिया। कोर्ट ने कहा कि चार हफ्तों के भीतर सभी पक्ष अपने-अपने जवाब दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
गौरतलब है कि रानी कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी बहू प्रिया कपूर और एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों समेत 22 लोगों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किया है। रानी ने आरोप लगाया है कि प्रिया और करिश्मा के बच्चों ने उनकी पूरी संपत्ति हड़पने के लिए एक धोखाधड़ी वाला फैमिली ट्रस्ट बनाया। उनका कहना है कि यह ट्रस्ट फर्जी और बेकार है। रानी कपूर ने बताया कि उनकी संपत्ति और पारिवारिक विरासत उनके जानने या अनुमति के बिना उस ट्रस्ट में गैर-कानूनी तरीके से डाल दी गई।