गिरिराज सिंह का पाकिस्तान पर वार: "खेल के मैदान से युद्धभूमि तक, हर जगह हार रहा, अब मांग रहा भीख"

चाहे खेल का मैदान हो या युद्ध का मैदान, पाकिस्तान हर जगह हार रहा है : गिरिराज सिंह


नई दिल्ली, 10 फरवरी। टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के फैसले से पाकिस्तान के यू-टर्न को लेकर देश की राजनीति में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री से लेकर विभिन्न राज्यों के नेताओं और विपक्षी दलों ने पाकिस्तान के इस कदम पर अलग-अलग नजरिए से अपनी बात रखी है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पाकिस्तान की स्थिति पर दया आती है। उन्होंने कहा कि चाहे खेल का मैदान हो या युद्ध का मैदान, पाकिस्तान हर जगह हार रहा है और आज दुनिया भर में मदद की भीख मांग रहा है। पाकिस्तान की हालत अब ऐसी हो गई है कि वह किसी भी मोर्चे पर मजबूती से खड़ा नहीं हो पा रहा।

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने कहा कि सरकार देश की जनता की भावनाओं के साथ खड़ी है और आगे भी ऐसा करते रहना चाहिए। खिलाड़ी पूरे देश और दुनिया का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब खिलाड़ी जीतते हैं, तो देश जीतता है। खेल को खेल की भावना से देखा जाना चाहिए, लेकिन देश की भावनाएं सर्वोपरि हैं।

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच मैच होता है, तो भारतीय खिलाड़ी कई बार पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से भी इनकार कर चुके हैं। उन्होंने साफ किया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय दायित्व है, जहां आईसीसी की भूमिका होती है और बीसीसीआई एक स्वतंत्र संस्था है, जो आईसीसी के नियमों के अनुसार काम करती है।

इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने पाकिस्तान के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने नाटक के बाद पाकिस्तान खेलने के लिए तैयार हुआ, लेकिन सवाल यह है कि सीजफायर के तुरंत बाद मैच क्यों रखे गए और एक टी20 मैच को लेकर इतना हंगामा क्यों किया गया?

उन्होंने आशंका जताई कि कहीं न कहीं यह मामला व्यावसायिक हितों से जुड़ा है, क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच का व्यावसायिक मूल्य बहुत ज्यादा होता है। उनके अनुसार, तमाम ड्रामे के बाद पाकिस्तान ने आखिरकार खेलने का फैसला किया, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है।

समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव कुमार राय ने कहा कि हमेशा दूसरों की सोच पर निर्भर रहना आत्मनिर्भरता नहीं कहलाता।
 

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