11 फरवरी, बुधवार को बन रहा दुर्लभ संयोग! सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग में पाएं हर कार्य में सफलता

11 फरवरी का पंचांग: बुधवार को सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग, नोट कर लें राहुकाल


नई दिल्ली, 11 फरवरी। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। इसके पांच अंग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार से शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। चाहे नया काम शुरू करना हो, विवाह हो या पूजा-पाठ, पंचांग देखकर ही सही मुहूर्त चुना जाता है।

दृक पंचांग के अनुसार, 11 फरवरी, बुधवार को कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि सुबह 9 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी। नक्षत्र अनुराधा सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक प्रभावी रहेगा, फिर ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे।

वहीं, सूर्योदय 7 बजकर 3 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 8 मिनट पर होगा। 11 फरवरी के महत्वपूर्ण योग की बात करें तो सुबह 7 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 53 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग दोनों एक साथ रहेंगे। यह दुर्लभ संयोग बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान नए कार्य शुरू करना, पूजा, हवन, दान या अन्य मंगल कार्य करने से विशेष लाभ मिलता है।

अन्य शुभ मुहूर्त में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 6 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक है। अमृत काल 12 फरवरी की सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।

अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। योग व्याघात 12 फरवरी की देर रात 2 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। वर्ज्य शाम 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक और गंड मूल सुबह 10 बजकर 53 मिनट से अगले दिन सुबह तक प्रभावी रहेगा। धर्म शास्त्र के अनुसार, अशुभ काल से दूर रहना चाहिए और पंचांग का ध्यान रखकर ही कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना सही रहता है।

राहुकाल दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य के करने से वह निष्फल होता है और बाधाएं आती हैं। अन्य अशुभ समय में यमगंड सुबह 8 बजकर 26 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

बुधवार का दिन विघ्न विनाशन गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन गणपति और बुध ग्रह की विधि-विधान से पूजन करने से बाधाओं का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति समृद्धि का संचार होता है। वहीं, बुध ग्रह भी शांत होते हैं।
 

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