विपक्षी सांसदों का गंभीर आरोप, लोकसभा में आवाज़ दबा रहे स्पीकर बिरला! लाने की तैयारी में अविश्वास प्रस्ताव

विपक्षी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर लगाया आरोप, कहा- विपक्ष को नहीं रखने दी जा रही अपनी बात


नई दिल्ली, 9 फरवरी। सांसद में विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। विपक्षी सांसदों का आरोप है कि सदन में उनको बोलने नहीं दिया जा रहा है और लोकसभा अध्यक्ष इस पर कुछ नहीं कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने लोकसभा में विपक्ष के सवालों को उठाते हुए कहा कि विपक्ष चाहता है कि सदन में गंभीर चर्चाएं हों, खासकर अमेरिका से डील पर। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय सदन में अपने तर्कों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। सरकार को आगे आकर बहुत सी बातों को न लेकर सीधे-सीधे विपक्ष के सवाल का जवाब देना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने पर अखिलेश यादव ने कहा, "स्पीकर का सम्मान और सदन की गरिमा महत्वपूर्ण हैं। उन बातों को लेकर हमने बातचीत की है, देखिए क्या निकलता है। हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि जिस तरह से बाजार खोला जा रहा है, जिस तरह से ढील दी गई है, उस पर चर्चा होनी चाहिए।"

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैंने स्वयं एक सांसद के रूप में देखा है कि इन परंपराओं का हर लोकसभा अध्यक्ष ने निर्वहन किया है; विपक्ष को बुलवाना एक संवैधानिक दायित्व भी है। मैं उम्मीद करूंगा कि लोकसभा अध्यक्ष उस संवैधानिक दायित्व, उस परंपरा का ख्याल रखते हुए नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर देंगे।"

उन्होंने कहा कि अगर सरकार विपक्ष रहित संसद और विपक्ष रहित देश चाहती है, तो लोकतंत्र और संविधान निर्माताओं ने जिस लोकतंत्र की रचना की थी, उसके साथ न्याय नहीं हो रहा।

वहीं, कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "हम लोगों को संसद में बोलने नहीं दिया जाता है। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कोई सांसद खड़ा हो जाता है, तो उसे बोलने दिया जाता है। इसका हम लोग विरोध कर रहे हैं। हम लोग चाहते थे कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला निष्पक्ष जांच करें, लेकिन उन्होंने इसको भी नजरअंदाज किया है।"

उन्होंने कहा कि हम लोग जनता की समस्या रखने के लिए आते हैं और लोकसभा अध्यक्ष से अपेक्षा करते हैं कि वह हमारी बात सुने, जिससे जनता की बातें सरकार तक पहुंच सकें और उनका समाधान भी हो सके। सदन में पक्ष और विपक्ष के लिए एक ही नियम होते हैं, लेकिन इन दिनों दोनों के लिए अलग-अलग नियम बना दिए गए हैं जो सही नहीं हैं।
 

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