पीएम मोदी देंगे उत्तर-पूर्व को पहला इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड, 14 फरवरी को राफेल-सुखोई दिखाएंगे भारतीय वायुसेना की प्रचंड ताकत

पीएम मोदी 14 फरवरी को असम में इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का करेंगे उद्घाटन, राफेल-सुखोई दिखाएंगे ताकत


नई दिल्ली, 9 फरवरी। भविष्य में दो-फ्रंट युद्ध की संभावनाओं को देखते हुए भारत अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।

असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान इलाके में ऐसी ही एक अत्याधुनिक इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड बनकर तैयार हो चुकी है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, डिब्रूगढ़ के मोरान से गुजरने वाले नेशनल हाईवे नंबर-2 पर 4.2 किलोमीटर लंबी एयर स्ट्रिप तैयार की गई है। यह उत्तर-पूर्व भारत में एक्सप्रेसवे पर बनी पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा है।

इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उद्घाटन के मौके पर भारतीय वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन भी किया जाएगा। राफेल और सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट इस एयर स्ट्रिप पर टच एंड गो ड्रिल को अंजाम देंगे। वहीं, फिक्स्ड विंग ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और एएन-32 इसी स्ट्रिप पर लैंडिंग और टेकऑफ ड्रिल करेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले 16 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बने एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया था। उस दौरान प्रधानमंत्री स्वयं सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे थे।

भारतीय वायुसेना जहां नए फाइटर जेट, हथियार, एयरबेस, हेलिपैड और आधुनिक उपकरणों के जरिए अपनी क्षमता बढ़ा रही है, वहीं केंद्र सरकार का सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड विकसित करने पर जोर दे रहा है।

संसद में दिए गए एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने देशभर में 28 इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड को चिन्हित किया है। इनमें असम में 5, पश्चिम बंगाल में 4, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 3-3, तमिलनाडु, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में 2-2, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में 1-1 ईएलएफ शामिल हैं।

इनमें से कई इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड बनकर तैयार हो चुकी हैं और उनका आधिकारिक उद्घाटन भी किया जा चुका है। नेशनल हाईवे के साथ-साथ राज्य सरकारें स्टेट हाईवे पर भी ऐसी सुविधाओं का निर्माण कर रही हैं।

पिछले साल आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के अड्डंकी में नेशनल हाईवे नंबर-16 पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड को सक्रिय किया गया था। इससे पहले 2016 में दिल्ली–आगरा और 2017 में लखनऊ–आगरा एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के पास वायुसेना ने ऐसी ड्रिल को अंजाम दिया था। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास भी नेशनल हाईवे पर इमरजेंसी एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया जा चुका है।

दरअसल, युद्ध की स्थिति में दुश्मन की पहली कोशिश एयरबेस को निशाना बनाने की होती है। ऐसे में वैकल्पिक रनवे के रूप में ये हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप बेहद अहम साबित होती हैं। इसके अलावा, हवाई युद्ध के दौरान यदि किसी फाइटर जेट का ईंधन कम हो जाए और वह एयरबेस तक न पहुंच सके, तो वह सुरक्षित रूप से ऐसी स्ट्रिप पर उतर सकता है। साथ ही, आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में भी इन रनवे का उपयोग किया जा सकता है।
 

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