मोहन भागवत के सावरकर को भारत रत्न सुझाव पर माजिद मेमन की अपील: इसे सकारात्मक ही देखें, सिर्फ एक राय है

मोहन भागवत ने सावरकर को भारत रत्न का सिर्फ सुझाव दिया, इसे सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए: माजिद मेमन


मुंबई, 9 फरवरी। पूर्व सांसद राज्यसभा माजिद मेमन ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ओर से वीर सावरकर को 'भारत रत्न' दिए जाने की मांग पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने सावरकर को भारत रत्न देने का सिर्फ सुझाव दिया है, जिसको सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए।

माजिद मेमन ने समाचार एजेंसी आईएएनए से बात करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के बारे में अगर आप सुझाव दे रहे हैं कि उसे भारत रत्न दिया जाए, तो उसका एक तरीका होता है। अब उनका यह कहना कि अगर वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाएगा तो भारत रत्न का अपना ही दर्जा बढ़ेगा, यह उनका एक बोलने का तरीका है।

पूर्व सांसद ने आगे कहा, "जहां तक कि वीर सावरकर को भारत रत्न देना चाहिए या नहीं देना चाहिए, यह मोहन भागवत का एक सुझाव है। सवाल ये बड़ा होता है कि जिस व्यक्ति को भारत रत्न के लिए सुझाव दिया जाता है, क्या वो उसके योग्य है। वो उसकी योग्यता पर जो रिवॉर्ड कमेटी होती है, पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, वो तय करेगी कि उसमें प्लस पॉइंट और माइनस पॉइंट क्या हैं। क्या वो उसके योग्य है और क्या वो प्लस पॉइंट करेगी? भागवत का एक सुझाव है, जिसको हमें पॉजिटिव तौर पर लेना चाहिए।"

मोहन भागवत की 'अच्छे दिन' वाली टिप्पणी पर भी माजिद मेमन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 वर्षगांठ के शुभ अवसर पर कई बातें कही हैं। यूजीसी, अच्छे दिन और तीन बच्चे पैदा करने की बात कही। उनके बहुत सारे बयान आए हैं। इसमें यह कहना है कि भारत में अच्छे दिन आरएसएस की वजह से आए हैं, यह गलत है। सवाल यह है कि क्या वाकई देश में अच्छे दिन आए हैं? क्या बेरोजगारी खत्म हुई और क्या महंगाई कम हुई?"

उन्होंने कहा, "जब अच्छे दिन आए ही नहीं तो इसका क्रेडिट आरएसएस ले या बीजेपी ले, यह सवाल ही नहीं बनता। उन्होंने कहा कि आप तीन बच्चे पैदा करें, यह आपकी मर्जी की बात है। यह कोई बात ही नहीं बनती। अगर वे ऐसा चाहते हैं तो उन्हें तीन बच्चों को लेकर नियम अनिवार्य रूप से बना देना चाहिए।"

पूर्व सांसद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों और एक तथाकथित वीडियो को लेकर उनकी आलोचना की। मजीद मेमन ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह पता होना चाहिए कि उन्होंने जिस पद को ग्रहण किया है, उसके लिए संविधान की शपथ ली थी। संविधान में साफ है कि मुख्यमंत्री को जाति-धर्म में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए।
 
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