जेजीयू का वैश्विक कदम: क्यूएस समिट में 5 देशों के 10 शीर्ष विश्वविद्यालयों संग खोले अध्ययन-अनुसंधान के द्वार

क्यूएस इंडिया समिट 2026 में जेजीयू ने 5 देशों के 10 प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू पर किए साइन


पणजी, 9 फरवरी। ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) ने गोवा में हाल ही में आयोजित क्यूएस इंडिया समिट 2026 के दौरान 5 देशों की 10 प्रमुख यूनिवर्सिटीज के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य जेजीयू और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इससे अलग-अलग देशों में पढ़ाई और रिसर्च के नए अवसर खुलेंगे।

इन एमओयू के तहत छात्र और शिक्षकों का आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, अकादमिक गतिविधियां और आपसी सहमति से तय किए गए अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों पर मिलकर काम किया जाएगा। इन सभी पहलों को पार्टनर यूनिवर्सिटीज की शैक्षणिक प्राथमिकताओं के अनुसार लागू किया जाएगा।

जेजीयू ने जिन विश्वविद्यालयों के साथ समझौता किया है उनमें-यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया, साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी, रॉयल रोड्स यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ गुएल्फ और ब्रॉक यूनिवर्सिटी (कनाडा), यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो (न्यूजीलैंड), यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड और यूनिवर्सिटी ऑफ स्टर्लिंग (यूनाइटेड किंगडम), डेल्टा यूनिवर्सिटी फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (मिस्र) और शिनावात्रा यूनिवर्सिटी (थाईलैंड) शामिल हैं।

इन नए समझौतों के साथ जेजीयू की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की संख्या 80 से अधिक देशों में 600 से ज्यादा हो गई है। इससे जेजीयू के छात्रों और शिक्षकों को विदेश में पढ़ाई, रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और वैश्विक स्तर पर अकादमिक सहयोग के बेहतर अवसर मिलेंगे।

इस मौके पर जेजीयू के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने कहा कि आज के आपस में जुड़े हुए विश्व में वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियां बहुत जरूरी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से न सिर्फ पढ़ाई और रिसर्च का दायरा बढ़ता है, बल्कि समाज के लिए भी उपयोगी ज्ञान तैयार होता है। क्यूएस इंडिया समिट में किए गए ये ओएमयू जेजीयू की वैश्विक शिक्षा और रिसर्च के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाते हैं।

जेजीयू के डीन (अकादमिक गवर्नेंस और स्टूडेंट लाइफ) प्रोफेसर पद्मनाभा रामानुजम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग तभी सफल होता है जब वह ठोस और परिणाम देने वाला हो। उन्होंने बताया कि ये समझौते रिसर्च, अकादमिक एक्सचेंज और फैकल्टी सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करते हैं और जेजीयू यह सुनिश्चित करेगा कि सभी पहलें तय शैक्षणिक मानकों के अनुसार लागू हों।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मामलों और वैश्विक पहलों के वाइस डीन प्रोफेसर (डॉ.) अखिल भारद्वाज ने कहा कि ये 10 एमओयू जेजीयू की अंतरराष्ट्रीय रणनीति को और मजबूत करेंगे। इससे छात्रों और शिक्षकों के लिए विदेशों में पढ़ाई, एक्सचेंज प्रोग्राम और संयुक्त शैक्षणिक कोर्स के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि जेजीयू लंबे समय तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय रिश्ते बनाने पर ध्यान दे रहा है, ताकि विश्वविद्यालय समुदाय को वास्तविक शैक्षणिक लाभ मिल सके।

क्यूएस इंडिया समिट 2026 में भारत और विदेश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस समिट में उच्च शिक्षा से जुड़े नवाचार, संस्थानों के बीच सहयोग और वैश्विक शिक्षा की उभरती जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
 
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