नई दिल्ली, 9 फरवरी। भारत-यूएस द्विपक्षीय समझौता वैश्विक व्यापार में देश के लिए एक अहम उपलब्धि है। इससे 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों को प्राथमिकता के आधार पर पहुंच मिलेगी। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में दी गई।
सरकार ने बताया कि यह समझौता काफी व्यापक है और इसमें बड़ी संख्या में वस्तुओं का जीरो ड्यूटी पर निर्यात सुनिश्चित किया गया है। इससे दोनों देशों में डिजिटल और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कॉरपोरेशन बढ़ेगा । इसमें किसानों, एमएसएमई और घरेलू इंडस्ट्री के लिए भी सुरक्षा को सुनिश्चित किया गया है।
भारत का अमेरिका को निर्यात 2024 में 86.35 अरब डॉलर था। ऐसे में यह समझौता होने से देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, लेदर, गेम्स एंड ज्वेलरी और कृषि के साथ-साथ फार्मा और टेक्नोलॉजी से जुड़ी इंडस्ट्री को फायदा होगा।
इस समझौते के तहत अमेरिका ने 30.94 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, 10.03 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है।
इसके अलावा, बयान में कहा गया कि टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से 18 प्रतिशत होने से निर्यातकों को 113 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार तक पहुंच मिलेगी। वहीं, मशीनों के निर्यात पर टैरिफ कम होकर 18 प्रतिशत होने से 477 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार में निर्यातकों को बड़े अवसर मिलेंगे।
अमेरिका का फुटवियर बाजार 42 अरब डॉलर का है। टैरिफ 50 प्रतिशत से कम होकर 18 प्रतिशत होने से भारतीय निर्यातकों को बड़े अवसर मिलेंगे।
सरकारी बयान में बताया गया कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत ने डेयरी, मांस, मुर्गीपालन और अनाज जैसे क्षेत्र को पुरी तरह सुरक्षित रखा है।
इस समझौते से अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी काफी इजाफा होगा, क्योंकि यूएस ने चीन पर 37 प्रतिशत, वियतनाम पर 20 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत, मलेशिया, इंडोनेशिया,फिलीपींस, कंबोडिया और थाईलैंड पर 19-19 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है।