भारत को लंबी अवधि में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने का मंत्र: व्यापार में खुलापन और बड़े सुधार, कहती है रिपोर्ट

लंबी अवधि में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए भारत को व्यापार में खुलापन और सुधारों पर देना होगा जोर: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 9 फरवरी। भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते के बीच एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बनने के लिए व्यापार में खुलेपन और जरूरी सुधारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

सिस्टमैटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए उल्टे ड्यूटी स्ट्रक्चर्स को ठीक करना, लॉजिस्टिक्स और कस्टम प्रक्रिया को आसान बनाकर कच्चे माल की लागत कम करना, बड़े पैमाने पर उत्पादन और रोजगार के लिए असेंबली आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, संरक्षणवाद कम करना, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) बढ़ाना, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) को मजबूत करना और जमीन, श्रम व कौशल से जुड़ी समस्याओं को आसान करना जरूरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संयुक्त रणनीति भारत को एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जाएगी, भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन (जीवीसी) से मजबूती से जोड़ेगी और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त व्यापार नीति से जुड़े जोखिमों को कम करते हुए लंबी अवधि में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करेगी।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत को टैरिफ में राहत और अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है, लेकिन इसके बदले भारत को 500 अरब डॉलर के आयात की प्रतिबद्धता और तेल आयात पर रोक जैसी शर्तों से भी जुड़ना होगा।

7 फरवरी 2026 को हुए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते में दोनों देशों के लिए बराबर बाजार पहुंच पर जोर दिया गया है। इसके तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और कृषि उत्पादों जैसे डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (डीडीजीएस), लाल ज्वार, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट पर टैरिफ कम या खत्म करने की सहमति दी है।

इसके बदले अमेरिका ने भारतीय कपड़ा, परिधान, चमड़ा, प्लास्टिक, केमिकल और मशीनरी जैसे कुछ उत्पादों पर 18 फीसदी का शुल्क तय किया है। साथ ही, अंतरिम समझौते के सही तरीके से लागू होने पर जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरे और विमान के पुर्जों पर शुल्क हटाने की योजना भी है।

अमेरिका के नजरिए से यह ढांचा व्यापार संतुलन बनाए रखने और अमेरिकी बाजार में मौजूद बाधाओं को दूर करने के लिए बनाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए यह सौदा टैरिफ में राहत लेकर आता है। इससे भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में प्रभावी शुल्क 18 फीसदी तक आ जाएगा, जो कई प्रतिस्पर्धी देशों से कम है। भारतीय वाणिज्य मंत्री के अनुसार, इससे रोजगार आधारित सेक्टर, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहल को बढ़ावा मिलेगा।

इस समझौते से राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लगाए गए विमान और उनके पुर्जों पर शुल्क हटेंगे, ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए विशेष कोटा मिलेगा, जिससे एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ को मदद मिलेगी।
 

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