भागवत की सावरकर को भारत रत्न मांग पर मचा सियासी संग्राम, विपक्ष ने बताया 'इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय'

वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर सियासत तेज, विपक्षी नेताओं ने जताई आपत्ति


नई दिल्ली, 9 फरवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की ओर से वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने संबंधी बयान के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे विवादास्पद बताया है।

सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है, तो यह भारत के इतिहास का एक दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय होगा। उन्होंने कहा कि सावरकर को आजादी की लड़ाई के लिए नहीं, बल्कि अंग्रेजों से माफी मांगने के लिए जाना जाता है। उन्हें नफरत, बंटवारे की राजनीति और ध्रुवीकरण का जनक माना जाता है। ऐसे में अगर उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाता है, तो यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन होगा।

समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि माफी मांगने वालों को भारत रत्न देने की परंपरा शुरू हो जाती है, तो फिर ऐसे सभी लोगों को यह सम्मान देना पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या हम अपने बच्चों को यह सिखाना चाहेंगे कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में दमनकारी ताकतों से माफी मांग ली जाए? मेरा मानना है कि देश के लोग ऐसी सोच को स्वीकार नहीं करेंगे।

इसी दौरान राजीव राय ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उत्तर प्रदेश को लेकर दिए गए बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। ओवैसी के 'योगी जी, मैं आ रहा हूं' वाले बयान पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह कहना चाहिए कि योगी जी, मुझे भेजा जा रहा है, मेरा ध्यान रखिए।

वहीं, ओवैसी की पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा ‘बुर्का पहनने वाली महिला के मुख्यमंत्री बनने’ संबंधी बयान पर भी सपा सांसद ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें विधायक बनने पर ध्यान देना चाहिए। सपा सांसद ने कहा कि पहले वे खुद एमएलए बन जाएं, उसके बाद मुख्यमंत्री बनने की बात करें।
 

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