नई दिल्ली, 8 फरवरी। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के तहत काम करने वाला केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) सोमवार को राज्यों के लिए बाढ़ प्रबंधन पर एक बैठक आयोजित करेगा।
बैठक का फोकस सीडब्ल्यूसी की मौजूदा सेवाओं और नई पहलों को सभी हितधारकों के साथ शेयर करना और बाढ़ की भविष्यवाणी, तैयारी और बाढ़ प्रबंधन योजना में केंद्र-राज्य कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने के लिए उनका फीडबैक लेना होगा। इसका मकसद अलग-अलग संबंधित केंद्रीय संगठनों के सहयोग से राज्य सरकारों की ओर से सीडब्ल्यूसी की भविष्यवाणी और निर्णय समर्थन सेवाओं का प्रभावी इस्तेमाल करना भी है।
बाढ़ संभावित राज्यों की सरकारों को बाढ़ की भविष्यवाणी की गतिविधियों में अपनी पहलों और सीडब्ल्यूसी सेवाओं के साथ तालमेल बनाने के विकल्पों को शेयर करने का मौका दिया जाएगा।
सुबह के तकनीकी सत्र में सीडब्ल्यूसी की बाढ़ की भविष्यवाणी करने की क्षमताओं पर जोर दिया जाएगा, जिसमें शॉर्ट-रेंज और सात-दिन की सलाह वाली भविष्यवाणियां, बाढ़ का अनुमान, इंटीग्रेटेड जलाशय संचालन सहायता, गोल्फ मॉनिटरिंग और एआई, एमएल एप्लीकेशन जैसी नई पहलें, आईएमडी से लंबी अवधि की बारिश की भविष्यवाणियों का इस्तेमाल, और अचानक आने वाली बाढ़ की भविष्यवाणी शामिल हैं। राज्य सरकारें बाढ़ की भविष्यवाणी और सीडब्ल्यूसी के साथ तालमेल में अपने अनुभव और पहलों को शेयर करेंगी।
दोपहर के सत्र में बाढ़ प्रबंधन और मिट्टी के कटाव को रोकने के कामों के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, जमा करने और मूल्यांकन के लिए गाइडलाइंस पर फोकस किया जाएगा, जिसमें प्रोजेक्ट की क्वालिटी सुधारने और समय पर मूल्यांकन पर जोर दिया जाएगा। राज्यों से मिले फीडबैक से गाइडलाइंस को रिवाइज करने में मदद मिलेगी।
वर्कशॉप का समापन सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन अनुपम प्रसाद की अध्यक्षता में एक सत्र के साथ होगा, जिसमें मुख्य बातों और आगे की राह के बारे में बताया जाएगा।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वी.एल. कांता राव वर्कशॉप का उद्घाटन करेंगे, जिसमें सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन और सदस्य और राज्य सरकारों के सीनियर अधिकारी शामिल होंगे।