इंफाल, 8 फरवरी। कुकी-जो समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने रविवार को अपने समुदाय से जुड़े राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को फिलहाल मैतेई बहुल इलाकों में जाने या वहां पोस्टिंग स्वीकार करने से बचने की सलाह दी है।
गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी क्षेत्र के पांच से छह जिलों में निवास करता है, जिनमें राज्य की राजधानी इंफाल भी शामिल है।
काउंसिल ने अपने बयान में कहा कि कुकी-जो लोगों और मैतेई समुदाय के बीच संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और न ही इस संघर्ष की मूल वजहों को सुलझाने या कुकी-जो लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई राजनीतिक समाधान, आपसी सहमति से हुआ समझौता या औपचारिक करार मौजूद है।
बयान में कहा गया, “जमीनी हालात अब भी नाजुक, तनावपूर्ण और अनिश्चित बने हुए हैं।”
केजेडसी ने यह भी कहा कि नई मैतेई-नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद इस बात की प्रबल संभावना है कि कर्मचारियों को मैतेई बहुल इलाकों में ड्यूटी या तबादले के आदेश दिए जा सकते हैं।
काउंसिल ने स्पष्ट रूप से कहा, “राज्य सरकार, केंद्र सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों या निजी संस्थानों में कार्यरत सभी कर्मचारियों को सख्त सलाह दी जाती है कि वे ऐसे इलाकों में न तो यात्रा करें, न ही वहां रिपोर्टिंग करें और न ही पोस्टिंग स्वीकार करें, भले ही इसके लिए आधिकारिक निर्देश क्यों न दिए गए हों।”
कुकी-जो काउंसिल ने कहा कि यह सलाह पूरी तरह से मानव जीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है। बयान में कहा गया, “जीवन अनमोल है और इस संवेदनशील दौर में कोई भी सरकारी ड्यूटी, पोस्टिंग या प्रशासनिक आदेश किसी की जान जोखिम में डालने के लायक नहीं है। जब तक कोई भरोसेमंद राजनीतिक समाधान या आपसी सहमति नहीं बनती, सुरक्षित आवागमन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की गारंटी नहीं दी जा सकती।”
काउंसिल ने प्रशासन से मौजूदा हालात को समझने और जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की अपील की, ताकि किसी भी नागरिक की जान खतरे में न पड़े। साथ ही कहा गया कि न्याय और स्थायी राजनीतिक समाधान के जरिए शांति बहाल होने तक सभी पक्षों को अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए।
इधर, 4 फरवरी को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से कई कुकी-जो संगठन विभिन्न पहाड़ी जिलों, खासकर चुराचांदपुर में, विरोध प्रदर्शन और बंद का आयोजन कर रहे हैं। ये संगठन अपनी समुदाय के विधायकों की राज्य सरकार के गठन में भागीदारी का विरोध कर रहे हैं।
तेनग्नौपाल समेत अन्य पहाड़ी जिलों से भी रैलियों, प्रदर्शनों और पुतला दहन की खबरें सामने आई हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (केएसओ), कुकी वूमन ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स, जॉइंट फोरम ऑफ सेवन (जेएफ7) और अन्य कुकी-जो संगठन कर रहे हैं।
5 फरवरी की शाम चुराचांदपुर जिले के तुईबोंग बाजार और फॉरेस्ट गेट इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसमें कम से कम पांच लोग घायल हो गए।
पुलिस के अनुसार, अधिकतर युवा प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कचरे के ढेर और टायरों में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने कुकी-जो समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भाजपा विधायक और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के खिलाफ भी नारे लगाए।
चुराचांदपुर और अन्य पहाड़ी जिलों में 4 फरवरी की शाम से तनाव बना हुआ है। उसी दिन नेमचा किपगेन ने मणिपुर भवन, नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। किपगेन युमनाम खेमचंद सिंह मंत्रिमंडल की एकमात्र महिला मंत्री हैं।
कुल 10 कुकी-जो विधायकों में से अब तक तीन (नेमचा किपगेन, एल.एम. खाउते और न्गुरसंगलूर सानेते) सरकार गठन की प्रक्रिया में शामिल हुए हैं। इनमें से सात विधायक भाजपा से हैं, जबकि तीन स्थानीय कुकी-जो संगठनों से जुड़े हुए हैं।
नेमचा किपगेन, एल.एम. खाउते और न्गुरसंगलूर सानेते ने 5 फरवरी को 12वीं मणिपुर विधानसभा के सातवें सत्र में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया था।