पंजाब के राज्यपाल कटारिया ने खडूर साहिब में टेका मत्था, युवाओं से संवाद कर सफलता और प्रेरणा के सूत्र दिए

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने खडूर साहिब में टेका मत्था, युवाओं को दिया सफलता का मंत्र


खडूर साहिब, 8 फरवरी। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने रविवार को ऐतिहासिक धार्मिक नगरी खडूर साहिब में स्थित गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब (अंगीठा साहिब श्री गुरु अंगद देव जी) में मत्था टेका। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से राज्यपाल को भेंट कर सम्मानित किया गया।

राज्यपाल ने गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा, सेवा परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए इसे सिख इतिहास और विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बताया।

इसके पश्चात राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने खडूर साहिब स्थित निशान-ए-सिखी संस्था का दौरा किया। यहां कार सेवा वाले बाबा सेवा सिंह की अगुवाई में स्वागत किया गया। राज्यपाल ने संस्था परिसर में यूपीएससी, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से संवाद किया।

उन्होंने छात्रों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन मिलना बेहद आवश्यक है।

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने छात्रों से कहा कि आप लोग जितना पढ़ेंगे उतने आगे जाएंगे। आप लोगों के आगे जाने पर देश का भी विकास होगा, इसीलिए मन लगाकर पढ़ना चाहिए।

वहीं, राज्यपाल ने निशान-ए-सिखी संस्था के प्रयासों की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की संस्थाएं न केवल शिक्षा को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखकर एक सकारात्मक और सशक्त समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं से अपील की कि वे मिलकर युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास करें, जिससे समाज में भी एक संदेश जाता है।

इस अवसर पर राज्यपाल ने निशाने सिखी संस्था परिसर में आम का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, "वैरोवाल, तरनतारन स्थित जैन मंदिर में दर्शन कर जैन समुदाय के सम्मानित सदस्यों तथा स्थानीय ग्रामीणों से भी सार्थक संवाद हुआ। ऐसे आध्यात्मिक संस्थान समाज में शांति, अहिंसा और भाईचारे के मूल्यों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सामाजिक समरसता को भी सुदृढ़ करते हैं।"
 

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