भारत की प्राथमिकता हमेशा सस्ते संसाधन, भारत-अमेरिका एफटीए दोनों के लिए फायदेमंद सौदा: संजीव सान्याल

भारत की प्राथमिकता हमेशा सस्ते संसाधन, भारत-अमेरिका एफटीए दोनों के लिए फायदेमंद सौदा: संजीव सान्याल


नई दिल्ली, 8 फरवरी। पीएम के आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्‍य संजीव सान्याल ने कहा कि भारत हमेशा देश के लिए सबसे सस्ते संसाधन हासिल करने पर ध्यान देगा। जब उनसे पूछा गया कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का भारत की तेल खरीद नीति पर क्या असर होगा, तो उन्होंने यह बात कही।

संजीव सान्याल ने कहा कि हमेशा से हमारी यही प्राथमिकता रही है कि हम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सस्ते संसाधनों की तलाश करें, और हमने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी दुनिया के प्रति हमारा यही दृष्टिकोण रहेगा।

एनडीटीवी प्रॉफिट कॉन्क्लेव 2026 में सान्याल ने कहा कि भारत-अमेरिका एफटीए दोनों देशों के लिए फायदेमंद सौदा होगा। उन्होंने कहा, "हमें वही समझौता मिलेगा जो हम चाहते हैं। जो समझौते और लेन-देन होंगे, वे भारत के फायदे के हिसाब से होंगे। पाइपलाइन में एक मजबूत डील है। मेरी समझ के अनुसार, भारत को भी वही मिला है जो वह चाहता था और अमेरिका को भी। यह दोनों के लिए अच्छा सौदा होगा।"

संजीव सान्याल ने 1960 के दशक की सोच और आज की आत्मनिर्भरता के बीच फर्क भी बताया। उन्होंने कहा कि पहले भारत हर चीज खुद बनाने और बाहर से आयात रोकने पर जोर देता था, लेकिन अब आत्मनिर्भरता का मतलब बदल गया है।

उन्होंने कहा कि आज आत्मनिर्भरता उन चीजों पर केंद्रित है जो हमारे लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से जरूरी हैं। हम हर चीज को बचाने की कोशिश नहीं करते। अब हमारा ध्यान निर्यात पर भी है, जो 1950 और 1960 के दशक में नहीं था।

सान्याल ने कहा कि भारत 1.4 अरब लोगों के लिए सस्ती ऊर्जा खरीदने के लिए जरूरी अंतरराष्ट्रीय रिश्ते बनाएगा।

उन्होंने आगे कहा, "अगर हमें लगे कि कोई काम भारत में करना आर्थिक रूप से सही नहीं है, तो हम दूसरे देशों से समझौते करेंगे ताकि वे काम हमारे लिए वहां हो सकें।"

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत तेल और गैस के मामले में बहुत समृद्ध देश नहीं है। हमें खोज जारी रखनी होगी, लेकिन आखिर में हमें दूसरे देशों पर निर्भर रहना ही पड़ेगा।

संजीव सान्याल ने कहा कि केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश को सस्ता ईंधन मिले। इसके साथ ही सरकार वैश्विक परिस्थितियों और दूसरे देशों की संवेदनाओं का भी ध्यान रखेगी।

उन्होंने बताया कि अगर आप आज हमसे कहें कि वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात करो, तो हम मना कर देंगे, क्योंकि हमारी रिफाइनरियां अभी वहां का भारी कच्चा तेल इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। लेकिन समय के साथ हम खुद को उसके अनुसार ढाल सकते हैं।
 

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