50 फीट की छलांग लगाने वाला मायावी हिम तेंदुआ, आखिर क्यों कहलाता है 'पहाड़ों का भूत'?

50 फीट तक छलांग... 'मायावी' हिम तेंदुए को क्यों कहा जाता है 'घोस्ट ऑफ द माउंटेंस'


नई दिल्ली, 8 फरवरी। हिम तेंदुआ, जिसे 'पहाड़ों का भूत' या घोस्ट ऑफ द माउंटेंस भी कहा जाता है, मध्य और दक्षिण एशिया के ऊंचे पहाड़ों का निवासी है। यह दुर्लभ और सुंदर 'बिग कैट' अपनी शातिर क्षमता और ठंडे वातावरण में जीवित रहने की अनोखी अनुकूलन क्षमता के लिए जानी जाती है।

हिम तेंदुआ खूबसूरत लेकिन मायावी जानवर माना जाता है। दरअसल, यह इतना चालाकी से छिप जाता है कि उसे देख पाना लगभग नामुमकिन होता है। उसके धुएं जैसे भूरे-सफेद फर पर गहरे धब्बे और रोसेट निशान होते हैं, जो बर्फीली चट्टानों और खड़ी ढलानों में पूरी तरह घुलमिल जाते हैं। बर्फ में सफेद फर के कारण वह और भी अदृश्य हो जाता है। ये जानवर ऊंचे पहाड़ों में रहते हैं, जहां इंसान बहुत कम पहुंचते हैं। हालांकि, आईयूसीएन रेड लिस्ट में इसे वर्तमान में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है, जहां इसकी आबादी में कमी जारी है।

सर्दियों में फर घना और लंबा हो जाता है, पेट पर 12 सेमी तक मोटा फर होता है, जो उन्हें ठंड से बचाता है। हिम तेंदुए के सिर, गर्दन और पैर काले धब्बों से ढके होते हैं, आंखें हल्के हरे या भूरे रंग की होती हैं और छोटे, गोल कान होते हैं। इनकी मजबूत छाती, लंबे पैर और बड़े पंजे बर्फ में आसानी से चलने में मदद करते हैं। सबसे खास इसकी लंबी पूंछ होती है। यह खड़ी ढलानों पर संतुलन बनाए रखने और ठंड में खुद को लपेटकर गर्म रखने में भी मददगार होती है।

हिम तेंदुआ पहाड़ों का सबसे फुर्तीला शिकारी है। जानकारी के अनुसार, यह एक छलांग में 50 फीट तक कूद सकता है, जो बहुत ऊंची चोटियों और खड़ी चट्टानों पर शिकार पकड़ने में मदद करता है। अपने शक्तिशाली पिछले पैरों की वजह से वह तेजी से आगे बढ़ता है और संतुलन के लिए लंबी पूंछ का इस्तेमाल करता है। एक ही जगह खड़े होकर यह 30 फीट और सीधी छलांग में 20 फीट तक कूद सकता है। यह तेज और चालाक शिकारी होता है।

हिम तेंदुआ भारत के साथ ही अफगानिस्तान, भूटान, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मंगोलिया, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान समेत अन्य कई देशों में भी पाए जाते हैं।। यह खड़ी चट्टानों, पथरीले इलाकों, घास के मैदानों और स्टेपी में पाया जाता है, लेकिन घने जंगलों से दूर एकाकी रहते हैं और शिकार के लिए सुबह-शाम एक्टिव रहते हैं।

यह म्याऊं की आवाज निकालता है। शिकार मुख्य रूप से जंगली भेड़-बकरी जैसे नीली भेड़, साइबेरियाई आइबेक्स, मार्खोर, अर्गली, हिमालयी तहर और कस्तूरी मृग होते हैं। यह छोटे शिकार जैसे मार्मोट, पिका भी खाता है।

इसके संरक्षण के लिए हिम तेंदुआ नेटवर्क, वैश्विक सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्य योजनाएं चल रही हैं। कई देशों में संरक्षित क्षेत्र बने हैं। जलवायु परिवर्तन, आवास क्षरण, अवैध शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष मुख्य खतरे हैं।
 

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