भारत-अमेरिका ट्रेड डील 'फरमान', समझौता नहीं: प्रियंका चतुर्वेदी का हमला, क्या मोदी सरकार दबाव में झुकी?

भारत-अमेरिका ट्रेड डील एग्रीमेंट नहीं, बल्कि फरमान है : प्रियंका चतुर्वेदी


नई दिल्ली, 8 फरवरी। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने इस समझौते को 'असमान और अन्यायपूर्ण' बताते हुए कहा कि यह कोई बराबरी का करार नहीं, बल्कि अमेरिका की ओर से दिया गया एक आदेश है, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया है।

प्रियंका चतुर्वेदी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कुछ दबावों में आकर और राष्ट्रीय हितों की कीमत पर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद यह बात कह चुके हैं कि भारत द्वारा रूस से तेल न खरीदने का आश्वासन दिए जाने के बाद ही 25 प्रतिशत डिजिटल टैरिफ वापस लिया गया। अगर भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीदने की कोशिश करता है, तो यह टैरिफ फिर से लागू किया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह समझौता भारत की स्वतंत्र विदेश और व्यापार नीति के अनुरूप है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि किसी भी देश की नीतियों पर भरोसा दशकों की विश्वसनीयता से बनता है। भारत की साख पिछले 70 वर्षों और उससे भी पहले से बनी है। भारत ने कभी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया, बल्कि जब भी आक्रामकता झेली, उसका उचित जवाब दिया।

उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब भारत ने खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों को वैक्सीन भेजकर अपनी नीति की विश्वसनीयता दिखाई। संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की नीति हमेशा मुक्त, समान और भरोसेमंद व्यापार की रही है।

इसके साथ ही प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली में गड्ढे में गिरकर एक बाइक सवार की मौत के मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जनता सरकार से बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद करती है, अच्छी और सुरक्षित सड़कें, साफ-सुथरा बुनियादी ढांचा। लेकिन सरकारें सड़क सुरक्षा के मूल नियमों का पालन नहीं कर पा रही हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि हाल ही में नोएडा में भी गड्ढे में गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी और अब दिल्ली में ऐसा ही दर्दनाक हादसा सामने आया है। दोनों ही जगह भाजपा की सरकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा और कब सरकारें जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगी।
 

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