जयपुर, 7 फरवरी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को अपनी सरकार के दो साल के कार्यकाल की तुलना पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल से की। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए सरकार के 'सुशासन' के दावों को चुनौती दी और कुप्रबंधन के मुद्दों को उजागर किया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि अपर्याप्त धन और कुप्रबंधन के कारण राजस्थान सरकारी स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) चरमरा रही है। उन्होंने बताया कि दवा विक्रेताओं को लगभग 800 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि भुगतान 21 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन फाइलें कथित तौर पर 6 महीने से सचिवालय में लंबित हैं। इस देरी से लाखों बुजुर्ग नागरिक और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त सरकारी कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं।
गहलोत ने मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधानसभा में अपने दो घंटे के भाषण में 'पांच साल बनाम दो साल' के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज राज्य में बुजुर्ग पेंशनभोगी और बीमार सरकारी कर्मचारी भी दवाइयां पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में आरजीएचएस योजना के तहत दवा विक्रेताओं का 800 करोड़ रुपए का बकाया है। नियम के अनुसार 21 दिनों के भीतर भुगतान होना चाहिए, लेकिन फाइलें छह महीने से लंबित हैं। नतीजा यह है कि बुजुर्ग पेंशनभोगी दवा दुकानों से खाली हाथ लौट रहे हैं और महंगे निजी इलाज का बोझ उठाने के लिए मजबूर हैं। सत्ता की कुर्सी पर बैठकर पिछली सरकार की आलोचना करना आसान है, लेकिन जनता को दी जाने वाली सुविधाओं को बनाए रखना मुश्किल है।
गहलोत ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे केवल भाषणों तक सीमित न रहें, बल्कि तत्काल भुगतान सुनिश्चित करके बुजुर्ग नागरिकों की जरूरतों को पूरा करें।
इससे पहले, बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार ने दो वर्षों में सड़कों, बिजली और कृषि के क्षेत्र में उतना विकास किया है जितना कांग्रेस सरकार ने पांच वर्षों में नहीं किया। हालांकि, गहलोत ने इसका खंडन करते हुए कहा कि विकास को केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की निरंतर उपलब्धता से भी मापा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धनराशि रोके रखने से पिछली कल्याणकारी योजनाओं को नुकसान पहुंच रहा है।