अगरतला, 7 फरवरी। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को आवारा पशुओं से जुड़ी दुर्घटनाओं और बीमारियों (विशेष रूप से रेबीज) की रोकथाम में प्रशिक्षण और जन जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।
पशु संसाधन विकास विभाग द्वारा आयोजित एक बैठक में साहा ने कहा कि सरकारी और निजी दोनों संस्थानों के छात्रों, शिक्षकों और आम जनता को रेबीज, पशु व्यवहार और संबंधित सुरक्षा उपायों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।
उन्होंने आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों के व्यवहार के बारे में जन शिक्षा के महत्व पर बल दिया, साथ ही दुर्घटनाओं और बीमारियों के प्रसार को कम करने के लिए निवारक उपायों और प्राथमिक उपचार प्रोटोकॉल को बढ़ावा देने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आवारा पशुओं को बचाने और उन्हें उपयुक्त आश्रय प्रदान करने की व्यवस्था कर रही है। इन जानवरों की सुरक्षा और उनसे जुड़ी दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विभिन्न पहलें लागू की गई हैं।
साहा ने पशुओं से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए घरेलू पशुओं के टीकाकरण को एक महत्वपूर्ण रणनीति बताया।
बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने 20 नगर पंचायत क्षेत्रों में आवारा पशुओं के लिए आश्रय गृहों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की।
इस समीक्षा में अगरतला नगर निगम और धर्मनगर नगर परिषद क्षेत्रों में पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों की स्थापना के साथ-साथ छह अतिरिक्त जिलों में प्रस्तावित केंद्रों का भी उल्लेख किया गया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आवारा पशु प्रबंधन कार्यक्रम को शुरू करने से पहले पर्याप्त जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने राज्य में आवारा पशुओं की कुल संख्या, विभिन्न स्थानों पर पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों के कामकाज और आवारा पशुओं के प्रबंधन में हुई प्रगति से संबंधित व्यापक आंकड़े भी मांगे।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में पशु संसाधन विकास विभाग की सचिव दीपा डी. नायर, शहरी विकास सचिव मिलिंद रामटेके, विधि सचिव शंकरी दास, अगरतला नगर निगम आयुक्त साजू वाहिद ए., एआरडी निदेशक नीरज कुमार चंचल और परिवहन विभाग के सचिव उत्तम कुमार चकमा शामिल थे।