गोलार्धों को जोड़ते चीन-उरुग्वे सहयोग से वैश्विक दक्षिण की एकजुटता को मिली नई उड़ान

गोलार्ध पार कर सहयोग करने से वैश्विक दक्षिण की एकजुटता प्रतिबिंबित


बीजिंग, 7 फरवरी। 1 से 7 फरवरी तक उरुग्वे के राष्ट्रपति यामानडु ओर्सी ने चीन की राजकीय यात्रा की, जिसने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर खींची। नए साल में ओर्सी चीन की यात्रा करने वाले पहले दक्षिण अमेरिकी नेता हैं।

खास बात है कि उरुग्वे इस साल 77 देशों का ग्रुप और चीन, लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियाई देशों के समुदाय और मरकोसर का घूर्णन अध्यक्ष देश है, इसलिए उनकी चीन यात्रा का महत्व द्विपक्षीय संबंधों से और व्यापक है।

चीन की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उनके साथ वार्ता की। दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान में कहा कि वे सर्वांगीण रणनीतिक साझेदारी गहराएंगे और समानतापूर्ण बर्ताव, पारस्परिक लाभ तथा साझी जीत के आधार पर सौहार्द मित्रता और मजबूत राजनीतिक विश्वास की स्थापना को दोहराया।

पेइचिंग में ओरसी ने सीपीसी इतिहास संग्रहालय ,लंबी दीवार और फोर्बिडन सिटी का दौरा किया और चीनी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इसके अलावा उन्होंने चीन के आर्थिक हब शांगहाई का दौरा भी किया।

ओर्सी ने अपने साथ उरुग्वे के इतिहास में सब से बड़ा प्रतिनिधि मंडल लिया, जिनमें कई व्यापार जगत की हस्तियां हैं। जाहिर है कि वे चीन के साथ आर्थिक व व्यापारिक सहयोग पर बड़ा महत्व देते हैं।

ध्यान रहे वर्तमान में चीन उरुग्वे का सब से बड़ा निर्यात बाजार है और सब से बड़ा आयात स्रोत देश भी है। यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार व निवेश आदि क्षेत्रों में 19 सहयोगी दोस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जिससे दोनों पक्षों के सहयोग की जीवित शक्ति दिखी।

विश्लेषकों के विचार में चीन-उरुग्वे मैत्रीपूर्ण आवाजाही चीन और लैटिन अमेरिका संबंधों का एक लघुचित्र है और वैश्विक दक्षिण की एकजुटता व सहयोग का प्रतिबिंब भी है। वर्तमान में विश्व नए दौर के परिवर्तन में दाखिल हुआ है।

एकतरफावाद और संरक्षणवाद बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में वैश्विक दक्षिण देशों को एकजुटता को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि समान विकास पूरा किया जाए और विश्व में अधिक स्थिरता व निश्चितता डाली जा सके।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
 

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