बेईमानी से नहीं, संविधान से चलता है देश: मंत्री संजय निषाद का दो टूक बयान, बताई असली शक्ति

हमारा देश बेईमानी से नहीं, संविधान से चलता है: मंत्री संजय निषाद


लखनऊ, 7 फरवरी। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा कि हमारा देश बेईमानी से नहीं चलता है, बल्कि संविधान से चलता है। लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत मतदान की प्रक्रिया को संपन्न कराया जाता है, जिसके तहत जनप्रतिनिधि का चयन किया जाता है और इन लोगों का काम होता है कि देश में संविधान को लागू कराएं। इस दिशा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाता है।

उन्होंने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि देश को आजाद कराने वाली 24 कैरेट की जो शक्तियां थीं, उन्हें कानून बनाकर अंग्रेजों ने उजाड़ा था। इसके बाद गुरिल्ला युद्ध से भयभीत हुए अंग्रेज भाग गए।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ने बताया कि 1931 में पहली जनगणना हुई। इसके बाद 1935 में अनुसूचित जाति के लोगों के हितों के लिए एक कानून भी बनाया गया, जिसमें उनके हितों का संरक्षण कैसे किया जाए, इसका पूरा प्रावधान था। इसके बाद 1947 में देश आजाद हो गया। इसके बाद 1950 में देश में संविधान लागू हो गया। इसके बाद संविधान में सूची बन गई। कुल 65 सूचियां बन गईं, जिसमें यह तय किया गया है कि कुल इतनी जातियां हैं। सामाजिक न्याय मंत्रालय कहता है कि 23 फीसद आरक्षण केवल लेदर मैन का आता है। अब यह दूसरे लोगों को कहा जा रहे हैं। इन बेईमानों ने अलग से अधिनियम बना दिया था, जिसका नाम था अनुसूचित जाति उत्तर प्रदेश लोक सेवा पिछड़े वर्ग आरक्षण 1994।

उन्होंने कहा कि क्रिमिनल कास्ट होने की वजह से यह सभी जातियां अंग्रेजों से छुपी हुई थीं। इसके बाद ये आगे चलकर विभिन्न प्रकार की जातियों में विभाजित हो गईं। इसी को देखते हुए 16 जून को एक शासनादेश लागू हुआ, जिसमें यह बताया गया था कि कौन-सी जातियां अनुसूचित जाति में शामिल हैं। इसमें भी हम 53वें नंबर पर शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा कि एक आंदोलन के बाद 31 दिसंबर 2016 को गवर्नर द्वारा जारी एक आदेश के जरिए मेरा नाम ओबीसी कैटेगरी से हटा दिया गया था। गवर्नर ने कहा कि हमारा समुदाय पिछड़ा नहीं है और एक नई लिस्ट जारी की। गवर्नर का नोटिफिकेशन इस आदेश के साथ अटैच है। इस नोटिफिकेशन के अनुसार, अब हमें पिछड़ा नहीं माना जाता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का आदेश कहता है कि ये लोग अनुसूचित वर्ग से आते हैं। इनके बारे में विचार-विमर्श किया जाए। राज्यपाल की भी अधिसूचना में कहा गया है कि ये लोग अनुसूचित वर्ग से हैं, लिहाजा इनके हितों के बारे में सोचा जाए।

मंत्री संजय निषाद ने कहा कि अब इन्हीं मांगों को लेकर लोगों के बीच में जा रहे हैं। उनके सामने इन मुद्दों का जिक्र करके उनसे कह रहे हैं कि हमें जनगणना में अनुसूचित वर्ग में शामिल किया जाए, क्योंकि हम इस समुदाय से आते हैं। इसके अलावा, हमारी मांग है कि मछुआरों को अनुसूचित वर्ग का प्रमाणपत्र जारी किया जाए। साथ ही, हमारी मांग है कि नई संशोधित ओबीसी की सूची जारी करा दी जाए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति पैदा नहीं हो। कल मेरी मुख्यमंत्री से मुलाकात होगी और मैं इन मुद्दों का उनके सामने जिक्र करूंगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद हर प्रकार के वादे पूरे किए गए। विकास के कई काम किए गए। राम मंदिर का भी निर्माण कर दिया गया। अब हमें पूरा विश्वास है कि हमने जो ज्ञापन सौंपा है, उस पर जरूर विचार-विमर्श किया जाएगा और एक ठोस फैसला लेकर उस दिशा में बड़े कदम उठाए जाएंगे। हमारा स्पष्ट कहना है कि जिन लोगों का भी नाम ओबीसी सूची में शामिल है, उनका नाम हटाकर एससी की सूची में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें आरक्षण की सुविधा प्राप्त हो सके।
 

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