50 साल बाद बाघ संरक्षण में नए युग की तैयारी! मंत्री भूपेंद्र यादव ने नीतिगत फैसलों की समीक्षा पर जोर दिया

राजस्थान: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'बाघ संरक्षण नीति' की समीक्षा का आह्वान किया


नई दिल्ली, 7 फरवरी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को राजस्थान के अलवर में आयोजित 'टाइगर रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर्स के सम्मेलन' का उद्घाटन किया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में उन्होंने नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की अब तक हुई 28 बैठकों में लिए गए सभी नीतिगत फैसलों की समीक्षा करने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि पुराने फैसलों को पहचानना जरूरी है, कौन से फैसले अब अप्रासंगिक हो गए हैं, कौन से लागू नहीं हो सके और कौन से पूरी तरह लागू हो चुके हैं। यह समीक्षा बाघ संरक्षण की नीति को वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप ढालने और जमीनी स्तर पर संरक्षण कार्यों को प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

भारत ने बाघ संरक्षण के 50 साल पूरे कर लिए हैं। मंत्री ने इसे व्यापक नीति समीक्षा का सही समय बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि पिछले पांच दशकों के फैसलों को एक औपचारिक नीति दस्तावेज में शामिल किया जाए और इसे अगली एनटीसीए बैठक का पहला एजेंडा बनाया जाए। सम्मेलन में राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा, पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, टाइगर रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और देशभर के टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि बाघों की आबादी का अनुमान, बचाव-पुनर्वास ढांचा, इंसान-वन्यजीव संघर्ष, टाइगर रिजर्व फंड का उपयोग और संरक्षण की बुनियाद मजबूत करने जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होनी चाहिए। सम्मेलन देश में बाघ संरक्षण की समग्र स्थिति की समीक्षा करेगा और नीति, प्रबंधन और फील्ड स्तर के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेगा।

मंत्री ने चार वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव रखा, जो क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों, बाघ आबादी में बदलाव और केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन का आकलन करेंगे। उन्होंने एनटीसीए को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन जैसे संस्थानों से बेहतर तालमेल बढ़ाने की सलाह दी, ताकि रिसर्च इनपुट से व्यावहारिक लाभ मिले।

चीता पुनर्प्रवेश कार्यक्रम पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि भारत विलुप्त जंगली प्रजाति को सफलतापूर्वक वापस लाया है। अब चीतों की तीसरी पीढ़ी भारत में जन्म ले चुकी है। बोत्सवाना से नया बैच फरवरी के अंत तक आने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थापित इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) में अब 24 सदस्य देश हैं और कई अन्य ऑब्जर्वर बनना चाहते हैं। यूएनडीपी, आईयूसीएन, एफएओ जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी जुड़ने में रुचि दिखा रही हैं। केंद्रीय बजट में घोषणा हुई है कि पहला ग्लोबल बिग कैट समिट भारत में होगा। आईबीसीए के जरिए बढ़ते तापमान, भूमि रेगिस्तानकरण और जैव-विविधता हानि जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान संभव है।

मंत्री ने कहा कि बाघ और अन्य वन्यजीव मुख्य क्षेत्रों से बाहर निकल रहे हैं, इसलिए मजबूत रिस्पॉन्स सिस्टम जरूरी है। घायल जानवरों, संघर्ष मामलों और अनाथ शावकों के लिए बचाव, पुनर्वास और ट्रांजिट ट्रीटमेंट केंद्रों का स्पष्ट फ्रेमवर्क बनाना चाहिए। इस मौके पर उन्होंने एनटीसीए की आउटरीच जर्नल 'स्ट्राइप्स' जारी की और नेशनल म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री की पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए।

दो दिनों में सम्मेलन में राज्य अधिकारी और फील्ड मैनेजर संरक्षण प्राथमिकताओं, चुनौतियों और उभरती जरूरतों पर चर्चा करेंगे। इसमें ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन 2026 की तैयारी, सुरक्षा-गश्त, आबादी प्रबंधन, संघर्ष प्रबंधन, फंड उपयोग और टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन को मजबूत करने जैसे राष्ट्रीय मुद्दे शामिल होंगे। बाघ मौतों के लंबित मामलों की समीक्षा भी होगी, ताकि प्रक्रियाएं फील्ड जरूरतों से जुड़ें। सम्मेलन का लक्ष्य नीति-प्रबंधन-फील्ड स्तर पर संवाद बढ़ाना, अनुभव साझा करना और राष्ट्रीय लक्ष्यों की दिशा में समन्वित प्रयास करना है।
 

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