गढ़चिरौली में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, 7 खूंखार माओवादी ढेर, शीर्ष नेता भी मारे गए; एक जवान शहीद

गढ़चिरौली में माओवादियों के खिलाफ बड़ी सफलता, 7 हार्डकोर माओवादी ढेर


गढ़चिरौली, 7 फरवरी। गढ़चिरौली में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान में एक बार फिर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। गढ़चिरौली पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त अभियान में 7 हार्डकोर माओवादियों को मार गिराया है। यह मुठभेड़ न सिर्फ संख्या के लिहाज से अहम है, बल्कि इसलिए भी खास है क्योंकि मारे गए माओवादियों में संगठन के बेहद वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता शामिल थे।

इनमें गढ़चिरौली डिविजनल कमेटी प्रभारी, पश्चिम सब-जोनल ब्यूरो प्रभारी और कंपनी नंबर-10 का प्रभारी डीकेएसजेडसी प्रभाकर जैसे कुख्यात माओवादी भी ढेर हुए हैं।

इस पूरे अभियान की कीमत भी चुकानी पड़ी। मुठभेड़ के दौरान विशेष अभियान पथक (सी-60) के जवान दीपक चिन्ना मडावी वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि एक अन्य जवान जोगा मडावी गोली लगने से घायल हो गए।

तीन दिन और तीन रात तक चले इस अभियान को गढ़चिरौली-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) सीमा क्षेत्र के घने जंगलों में अंजाम दिया गया। 3 फरवरी को खुफिया एजेंसियों से सूचना मिली थी कि माओवादी किसी बड़ी विध्वंसक कार्रवाई की योजना बना रहे हैं। सूचना विश्वसनीय थी, इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में तत्काल कार्रवाई का फैसला लिया गया। उपविभागीय पुलिस अधिकारी भामरागड अमर मोहिते के नेतृत्व में गढ़चिरौली पुलिस के विशेष अभियान पथक की 14 टुकड़ियां 3 फरवरी की रात जंगल की ओर रवाना की गईं।

4 फरवरी को जब जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, तभी जंगल में पहले से घात लगाए बैठे माओवादियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने पूरी सतर्कता और साहस के साथ आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान माओवादियों के दो ठिकानों को ध्वस्त किया गया, लेकिन घना जंगल, पहाड़ी इलाका और दुर्गम रास्तों के कारण तत्काल सघन तलाशी संभव नहीं हो सकी।

हालात की गंभीरता को देखते हुए 5 फरवरी को अभियान को और मजबूत किया गया। विशेष अभियान पथक की 4 अतिरिक्त टुकड़ियां और सीआरपीएफ की एक क्यूएटी टीम को भी ऑपरेशन में शामिल किया गया। उसी दिन हुई मुठभेड़ में 3 हार्डकोर माओवादियों के शव बरामद हुए, जिनके पास से 1 एके-47 राइफल और 1 एसएलआर भी मिली।

अगले दिन, 6 फरवरी को एक और मुठभेड़ हुई, जिसमें 4 अन्य नक्सलियों के शव घटनास्थल से बरामद किए गए। इस तरह तीन दिनों तक चले इस कठिन और चुनौतीपूर्ण अभियान में कुल 7 माओवादियों को मार गिराने में सुरक्षा बलों को सफलता मिली। मारे गए सभी माओवादी लंबे समय से सक्रिय थे और उन पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा कुल 71 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी जब्त की गई। घटनास्थल से 3 एके-47 राइफल, 1 एसएलआर, 1 .303 राइफल, 173 जिंदा कारतूस, 3 बीजीएल, 7 मैगजीन, कॉर्टेक्स वायर के 2 बंडल, जिलेटिन स्टिक, माओवादी साहित्य और रोजमर्रा के इस्तेमाल की अन्य सामग्री बरामद हुई।

मारे गए माओवादियों में सबसे बड़ा नाम प्रभाकर उर्फ रवी उर्फ प्रकालवीर उर्फ स्वामी उर्फ लोकेती चंदरराव का है। 57 वर्षीय प्रभाकर तेलंगाना के कामारेड्डी जिले का रहने वाला था और उस पर 25 लाख रुपए का इनाम था। उसके खिलाफ कुल 113 गंभीर अपराध दर्ज थे। उसके अलावा पागु मोडाम, अनिला उर्फ बुदरी कोवाची, कामेश पदा, भजनाथ उर्फ भिमा होळी, मंगली कुरसाम और जोगी सोढ़ी-मडावी जैसे सक्रिय माओवादी भी मारे गए।

इस अभियान में शहीद हुए जवान दीपक चिन्ना मडावी को 6 फरवरी को गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गई। घायल जवान जोगा मडावी का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

पूरा अभियान अपर पुलिस महानिदेशक (विशेष अभियान) डॉ. छेरिंग दोरजे, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील, आईजी अंकित गोयल, सीआरपीएफ डीआईजी अजय कुमार शर्मा और एसपी नीलोत्पल के मार्गदर्शन में सी-60 और सीआरपीएफ ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

आंकड़ों की मानें तो 2021 से अब तक गढ़चिरौली पुलिस 99 माओवादियों को ढेर कर चुकी है, 140 को गिरफ्तार कर चुकी है और 153 माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर चुकी है।
 

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