रायपुर, 7 फरवरी। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले बड़े उत्सव 'बस्तर पंडुम' का शनिवार को शुभारंभ हो गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में इस महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। यह आयोजन बस्तर की लोक कला, परंपराओं, नृत्य, संगीत, शिल्प और आदिवासी जीवनशैली को देश के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
राष्ट्रपति मुर्मु शनिवार सुबह जगदलपुर पहुंचीं। मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद वे जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित संभाग स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुईं, जहां उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया।
यह राष्ट्रपति का बस्तर का पहला दौरा है और वे बस्तर आने वाली पांचवीं राष्ट्रपति हैं। कार्यक्रम में आदिवासी कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने सबका मन मोह लिया। राष्ट्रपति ने बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को करीब से देखा और समझा।
'बस्तर पंडुम' छत्तीसगढ़ सरकार की एक खास पहल है, जिसका मकसद बस्तर संभाग के सात जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर की जनजातीय विरासत को संरक्षित करना और बढ़ावा देना है। इस उत्सव में पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, वेशभूषा और बोली-भाषा का जीवंत प्रदर्शन होता है। यह महोत्सव विभिन्न स्तरों पर आयोजित किया जाता है, जिसमें ग्राम, जनपद, जिला और संभाग स्तर शामिल हैं। इससे स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता है और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
इस उत्सव का समापन 9 फरवरी को होगा, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनकी गरिमामय उपस्थिति से यह आयोजन और भी खास हो जाएगा। बस्तर पंडुम न केवल सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास की सकारात्मक छवि को भी मजबूत करता है। यह महोत्सव आदिवासी समुदाय की पहचान को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभा रहा है।