नई दिल्ली, 6 फरवरी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक फ्रॉड से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) रेनू सक्सेना को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है।
सीबीआई ने यह मामला 30 मार्च 2012 को तत्कालीन पंजाब एंड सिंध बैंक, दीवान पब्लिक स्कूल, मेरठ शाखा के ब्रांच मैनेजर डीपी सिंह के खिलाफ दर्ज किया था। आरोप है कि डीपी सिंह ने 46 अन्य लोगों के साथ साजिश कर 24 हाउसिंग लोन और दो ओवरड्राफ्ट अगेंस्ट प्रॉपर्टी (ओडीपी) लोन मंजूर किए, जिनकी कुल राशि लगभग 3.63 करोड़ रुपए थी। ये ऋण उधारकर्ताओं और गारंटरों से संबंधित फर्जी और जाली पहचान व आय प्रमाण पत्रों के आधार पर स्वीकृत किए गए थे। रेनू सक्सेना इस मामले में आरोपियों में से एक हैं।
जांच में सामने आया कि आरोपी रेनू सक्सेना ने अपने पति एवं सह-आरोपी भूदेव सिंह के साथ मिलकर मेरठ में एक संपत्ति के लिए माया देवी के फर्जी नाम से एक झूठी सेल डीड तैयार की। इन जाली दस्तावेजों के आधार पर 29 मार्च 2011 को एक लाभार्थी को 14 लाख रुपये का हाउसिंग लोन मंजूर कराया गया।
सीबीआई ने इस मामले में 26 नवंबर 2014 को डीपी सिंह, रेनू सक्सेना और अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, समन जारी होने के बावजूद रेनू सक्सेना अदालत के समक्ष पेश नहीं हुईं। इसके बाद सक्षम न्यायालय ने 11 मई 2017 को उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी करते हुए उन्हें प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित कर दिया।
सीबीआई द्वारा आरोपी की तलाश में समन्वित प्रयास किए गए, जिससे पता चला कि रेनू सक्सेना मेरठ में रह रही थीं। इसके बाद सीबीआई ने 6 फरवरी 2026 को एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।