'कल्कि संभल' फिल्म मेकर्स का मौलाना बर्क पर कानूनी शिकंजा, धमकाने और उत्पीड़न के आरोप लगाए

'कल्कि संभल' की टीम ने मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क को भेजा कानूनी नोटिस, धमकी और मानसिक उत्पीड़न के लगाए आरोप


संभल, 6 फरवरी। 1978 के संभल दंगों पर आधारित फिल्म 'कल्कि संभल' को लेकर अब विवाद बढ़ता जा रहा है। फिल्म निर्माण कंपनी जानी फायरफॉक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने विवाद को कानूनी मोड़ दे दिया है। कंपनी ने संभल के वरिष्ठ धार्मिक नेता मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क को कानूनी नोटिस भेजा है।

कंपनी का आरोप है कि मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क ने फिल्म की वैध शूटिंग के दौरान सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए जो धमकी और डराने-धमकाने के स्वरूप में थे। नोटिस में कहा गया है कि इन बयानों के कारण फिल्म यूनिट में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हुई।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि 'कल्कि संभल' का निर्माण सभी कानूनी अनुमति, सरकारी लाइसेंस और वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जा रहा है।

जानी फायरफॉक्स मीडिया ने नोटिस में बताया कि 1978 के संभल दंगे एक ऐतिहासिक और सार्वजनिक घटना हैं। उन घटनाओं पर फिल्म बनाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत सभी को मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। फिल्म को रोकने के प्रयास संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हैं। यह फिल्म यूनिट को मानसिक उत्पीड़न और असुरक्षा महसूस कराना है।

कंपनी ने अपने नोटिस में ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए बताया कि 1978 के दंगों में सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार 184 हिंदुओं की मृत्यु हुई थी। ऐसे ऐतिहासिक तथ्य को दबाने की कोशिश करना एक गंभीर चिंता का विषय है।

कंपनी ने नोटिस के जरिए मांग रखी कि मौलाना ममलूकुर्रहमान बर्क 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी मांगे, अपने सभी बयान वापस लें, और भविष्य में फिल्म की शूटिंग या निर्माण में किसी भी प्रकार की बाधा न डालने का बिना शर्त आश्वासन दें।

इसके साथ ही कंपनी ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में 50 लाख रुपए जमा करने की भी मांग की है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर इन शर्तों का पालन नहीं हुआ, तो कानूनी, दीवानी और संवैधानिक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नोटिस प्राप्तकर्ता की होगी।
 

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