बेंगलुरु, 6 फरवरी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को राज्य भर के किसानों से अपील की कि वे केंद्र सरकार की उस कथित 'साजिश' का एकजुट होकर विरोध करें, जिसके तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना को खत्म कर विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम लागू किया जा रहा है।
वह इंटरनेशनल ट्रेड फेयर–2026, पोस्ट-हार्वेस्ट एग्रीकल्चर-किसानों का सशक्तीकरण और राज्य-स्तरीय कृषि वैज्ञानिक पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार हमेशा कृषि क्षेत्र के साथ खड़ी रही है और खेती को फायदेमंद बनाने और किसानों को सशक्त बनाने पर ज्यादा जोर दे रही है। किसानों को फसल कटाई के बाद की गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करके खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है।
सीएम ने कहा, "किसानों को उद्यमी बनना चाहिए। फसल उगाने के साथ-साथ, स्टोरेज, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और बाय-प्रोडक्ट्स के डेवलपमेंट में भी एक्टिव रूप से हिस्सा लेना चाहिए। ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को खेती में हिस्सा लेना चाहिए। आज जिन महिला किसानों को सम्मानित किया गया है, उनकी उपलब्धियां सच में प्रेरणादायक हैं।"
सीएम ने कहा कि सरकार किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज, खाद और कीटनाशक दे रही है और खेती की मशीनरी खरीदने के लिए 1,500 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी है। कर्नाटक फसल बीमा योजना लागू करने में देश का नंबर वन राज्य बन गया है, अब तक किसानों को बीमा मुआवजे के तौर पर 6,000 करोड़ रुपए बांटे जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि किसान ज्यादातर गन्ना और रागी जैसी फसलों तक ही सीमित हैं और कटाई के बाद के कामों (पोस्ट-हार्वेस्ट गतिविधियों) में अधिक भागीदारी की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “गन्ना किसानों के साथ चर्चा और बातचीत के बाद कीमतें तय की गईं। इसी तरह किसानों के लाभ के लिए तूर दाल की खरीद के लिए एक महीने पहले ही खरीद केंद्र खोले गए।”
मक्का उत्पादन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्यादा पैदावार होने पर उत्पादन 54 लाख मीट्रिक टन तक हो सकता है। केंद्र सरकार ने इसकी कीमत 2,400 रुपए प्रति क्विंटल तय की है।
उन्होंने बताया कि 40 लाख मीट्रिक टन मक्का की खरीद सुनिश्चित करने के लिए मक्का आधारित उद्योगों और एथनॉल निर्माताओं के साथ बातचीत की गई।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से बड़ी संख्या में खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, “आजादी से पहले करीब 80 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर थी, जो अब घटकर 62 प्रतिशत रह गई है।”
उन्होंने कहा कि भारत ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में किए गए कई वादे पूरे किए गए हैं। इनमें कृषि भाग्य योजना को फिर से शुरू करना अहम है। उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकार ने अपने कार्यकाल में इस योजना को रोक दिया था। हमारी सरकार ने इसे फिर से शुरू किया और इसके लिए करीब 200 करोड़ रुपए आवंटित किए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की गारंटी योजनाएं- शक्ति, गृह ज्योति और गृह लक्ष्मी- महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अन्न भाग्य योजना के तहत गरीब लोग पैसे बचा पा रहे हैं और निवेश भी कर पा रहे हैं। ये जन-हितैषी योजनाएं सभी को समान अवसर देने के उद्देश्य से लागू की गई हैं।
सिद्दारमैया ने कहा कि मनरेगा योजना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू की गई थी, जिससे महिलाओं, आदिवासियों और मजदूरों को रोजगार मिला। इस योजना के तहत काम ग्राम सभाओं में तय किए जाते थे।
उन्होंने कहा, “अब ये अधिकार केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिए हैं। अब केंद्र ही यह तय करता है कि कौन-सा काम होगा और कितना पैसा मिलेगा। मैं राज्य के सभी किसानों से अपील करता हूं कि वे मनरेगा की बहाली की मांग करें और वीबी-जी राम जी योजना को खारिज करें।”