जम्मू, 6 फरवरी। जम्मू-कश्मीर के बजट को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। नेताओं ने इस बजट से जुड़ी अपनी-अपनी उम्मीदें और आशंकाएं जाहिर की हैं। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यह बजट जम्मू-कश्मीर के लोगों, खासकर युवाओं और किसानों के लिए कितनी राहत लेकर आता है।
पीडीपी वहीद उर रहमान पारा ने बजट से बड़ी उम्मीदें जताईं। उन्होंने कहा कि वे आशावादी हैं और उम्मीद करते हैं कि यह बजट जम्मू-कश्मीर के लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम करेगा। बजट में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जाने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित युवाओं की बेरोजगारी का मुद्दा और किसानों की दैनिक मजदूरी से जुड़ा मामला इस बजट में जरूर सुलझाया जाएगा। ये मुद्दा पिछले एक साल से अटका हुआ है।
वहीं, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने बजट को लेकर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल से लोगों की उम्मीदें काफी ज्यादा रही हैं, लेकिन वे पूरी नहीं हो पाईं। विपक्ष में होने के बावजूद उन्होंने माना कि बजट के वास्तविक प्रभाव का आकलन तब ही किया जा सकता है, जब इसके विस्तृत प्रावधान सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि वे खास तौर पर यह देखेंगे कि जम्मू क्षेत्र के लिए बजट में क्या और कितना आवंटन किया गया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में जम्मू-कश्मीर के लिए अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपए का प्रावधान कर उदारता दिखाई है। हालांकि, उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। सुनील शर्मा ने कहा कि उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं है कि इस बजट का जमीनी स्तर पर बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि पिछले साल भी उमर अब्दुल्ला द्वारा घोषित कई योजनाएं जमीन पर लागू होती नजर नहीं आईं।
कांग्रेस विधायक निजाम-उद-दीन भट्ट ने भी बजट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उम्मीद यही है कि यह एक 'वाइब्रेंट बजट' साबित हो। ऐसा बजट जिसमें उत्पादक क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाए, रोजगार सृजन पर जोर हो और पर्यटन को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।