बिहार के मधुबनी में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग का बड़ा भंडाफोड़, चार गिरफ्तार, भारी नकदी-उपकरण बरामद

बिहार के मधुबनी में अंतरराष्ट्रीय लिंक वाले साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार


पटना, 6 फरवरी। बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़ किया है। गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कैश मिला।

जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मधुबनी पुलिस ने गुरुवार को सात सिम बॉक्स, 136 मोबाइल फोन और सिम कार्ड, कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और 1.68 लाख रुपये कैश के साथ-साथ साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए।

यह कार्रवाई खास खुफिया जानकारी के आधार पर की गई और इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (ईओयू), डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट (डीआईयू), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (टीओटी), नगर पुलिस स्टेशन और साइबर पुलिस स्टेशन की टीमों ने मिलकर ऑपरेशन किया।

मधुबनी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) योगेंद्र कुमार ने बयान में कहा कि पहली छापेमारी नगर पुलिस स्टेशन इलाके में रेलवे स्टेशन के पास स्थित एक मोबाइल रिपेयर सेंटर पर की गई। इसके बाद तिरहुत कॉलोनी में मनदीप कुमार, मोहम्मद एहसान, रौशन कुमार और विकास कुमार के घरों पर छापे मारे गए और इन चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि मनदीप कुमार, रौशन कुमार की मदद से मधुबनी के तिरहुत कॉलोनी में अपने घर के कमरे से एक अवैध टेलीकॉम सेटअप चला रहा था। एसपी ने कहा, "सिम बॉक्स और प्राइवेट कंपनियों के टेलीकॉम डिवाइस का इस्तेमाल करके वह एक ट्रंकिंग सिस्टम के जरिए चीन, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार और अन्य देशों में बैठे साइबर धोखेबाजों के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड कर रहा था।"

उन्होंने बताया कि आरोपी एक अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज चला रहे थे, जिसके जरिए इंटरनेशनल वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) कॉल को लोकल वॉयस कॉल में बदला जाता था, जिससे साइबर अपराधी अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान छिपाकर भारत में लोगों को धोखा दे पाते थे।

पूछताछ के दौरान आरोपी मनदीप कुमार ने बताया कि रौशन कुमार ने उसे सात सिम बॉक्स और सिम कार्ड सप्लाई करने में मदद की थी, जिसके लिए उसे प्रति सिम 800 रुपए दिए गए थे।

आरोप है कि सिम कार्ड अनजान लोगों के नाम पर लिए गए थे और डिजिटल सबूत मिटाने के लिए डीएक्टिवेट करने के बाद उन्हें नष्ट कर दिया गया था। बरामद सभी उपकरण जब्त कर लिए गए हैं और आरोपियों के खिलाफ कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
 
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