हरिद्वार, 5 फरवरी। भारत माता मंदिर में गुरु समाधि और मूर्ति स्थापना समारोह के दूसरे दिन संतों, शक्ति और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। इस अवसर पर कई संत-महात्मा और गणमान्य लोग मौजूद रहे और सभी ने स्वामी सत्यमित्रानंद जी के योगदान को याद किया।
स्वामी जी ने भारत माता मंदिर की स्थापना कर राष्ट्रभक्ति, सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को मजबूत आधार प्रदान किया था। वे पद्मभूषण से सम्मानित थे और सनातन मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उनका जीवन समर्पित रहा।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "यह मूर्ति स्थापना समारोह स्वामी अवधेशानंद गिरि के गुरु ब्रह्मलीन संत सत्यमित्रानंद की स्मृति में हो रहा है। स्वामी जी ने संस्कृति को बढ़ावा दिया और समन्वय का कार्य किया। वे देशभक्ति और राष्ट्रवाद के प्रतीक हैं। आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा लेंगी और सनातन के लिए काम करेंगी।"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वे पूज्य जूनापीठाधीश्वर महाराज के आमंत्रण पर शामिल हुए। उन्होंने स्वामी सत्यमित्रानंद के भारत माता मंदिर स्थापना जैसे विश्वसनीय कार्यों की गौरव गाथा बताई और कहा कि सभी अतिथियों की मौजूदगी में यह आयोजन बहुत सफल रहा।
स्वामी अवधेशानंद गिरि ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री, बिहार के राज्यपाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह जैसे गणमान्य लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम भारत की एकता और सनातन मूल्यों पर चर्चा कर रहे हैं। सनातन धर्म भारत की रीढ़ है। यदि सनातन जीवित रहेगा तो भारत रहेगा।"
योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, "मेरा पंथ, मेरा देश, मेरी जाति और मेरा विचार सर्वश्रेष्ठ है। सभी में एक ही ब्रह्मतत्व और सच्चिदानंद परमात्मा का वास होता है। यह विचार सबको जोड़कर रखता है। दुनिया में फसाद इसलिए है क्योंकि कुछ लोग अपने धर्म या देश को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। सनातन धर्म समानता सिखाता है। पूज्य सत्यामित्रानंद जैसे संत हमें धर्म-सत्व और संत-सत्व की प्रेरणा देते हैं।"