ईरान की दोस्ती में पाकिस्तान ने खोई अमेरिका की विश्वसनीयता, क्या रद्द होगा 'गैर-नाटो सहयोगी' का दर्जा? रिपोर्ट

ईरान के प्रति पाकिस्तान की निष्ठा से अमेरिका के सहयोगी के रूप में उसकी विश्वसनीयता पर सवाल: रिपोर्ट


वॉशिंगटन, 5 फरवरी। अमेरिका के विरोधी देश ईरान के प्रति पाकिस्तान का खुला समर्थन अमेरिका के प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (मेजर नॉन-नाटो एलाय/एमएनएनए) के रूप में उसकी विश्वसनीयता को सीधे तौर पर कमजोर करता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान के साथ बढ़ते जुड़ाव के मद्देनजर पाकिस्तान को किसी भी अंतरराष्ट्रीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बाहर रखा जाना चाहिए और ईरान के साथ वॉशिंगटन-नेतृत्व वाली वार्ताओं में उसकी भूमिका पर रोक लगाई जानी चाहिए।

अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को कूटनीतिक संरक्षण देने की पाकिस्तान की आदत उसे एक अविश्वसनीय मध्यस्थ बनाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद को अमेरिका का सच्चा सहयोगी नहीं माना जा सकता और उसके एमएनएनए दर्जे पर गंभीर पुनर्विचार, यहां तक कि उसे वापस लेने की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया, “पाकिस्तान को अमेरिका की ओर से मेजर नॉन-नाटो एलाय (एमएनएनए) का दर्जा प्राप्त है, जिसके तहत उसे सैन्य सहयोग और उपकरणों तक विशेष पहुंच मिलती है। इसके अलावा 15 जनवरी 2026 को अमेरिका के नेतृत्व में अंतर-सरकारी संगठन ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की स्थापना की गई। 18 जनवरी को संगठन के अध्यक्ष के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया, “पाकिस्तान को 6 फरवरी को तुर्किये में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ता में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, जहां उससे सहायक भूमिका निभाने की उम्मीद है। हालांकि, पाकिस्तान बार-बार अमेरिका के रणनीतिक साझेदार के रूप में अपनी अविश्वसनीयता साबित कर चुका है।”

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि ईरान द्वारा नागरिकों की कथित सामूहिक हत्याओं की खबरों के बावजूद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तेहरान के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, “13 जनवरी 2026 को ख्वाजा आसिफ ने कहा कि ईरान हमेशा पाकिस्तान का प्रिय पड़ोसी और भाई रहा है और उसकी सुरक्षा व संप्रभुता पाकिस्तान के लिए बेहद अहम है। वहीं, 20 जनवरी को इस्लामाबाद में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोघद्दम के साथ बैठक में पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान हर परिस्थिति में ईरान के साथ मजबूती से खड़ा है।”

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 24 जनवरी को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान में प्रदर्शनों पर की गई हिंसक कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय जांच को विस्तार देने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने पर पाकिस्तान का आभार जताया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इसका एक स्पष्ट उदाहरण जून 2025 के 12-दिवसीय युद्ध के दौरान सामने आया, जब ईरान और इजरायल-अमेरिका गठबंधन के बीच सीधा सशस्त्र संघर्ष हुआ। इस दौरान अमेरिकी बलों ने ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमलों में हिस्सा लिया, लेकिन पाकिस्तान ने ईरान के पक्ष में खुलकर और अडिग समर्थन व्यक्त किया।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह रुख युद्ध के बाद और मजबूत होता गया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने 2-3 अगस्त 2025 को पाकिस्तान का दौरा किया, जो युद्ध के बाद उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा थी। दोनों देशों के अधिकारियों, थिंक टैंकों और मीडिया ने इस यात्रा को बड़ी सफलता बताया और वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने की महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित किया।
 

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