इस्लामाबाद, 5 फरवरी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और राज्यपाल फैसल करीम कुंडी के बीच गहराता राजनीतिक टकराव एक अस्थिर और संवेदनशील क्षेत्र में आतंकवाद के बढ़ते खतरे को और गंभीर बना रहा है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
अफरीदी ने हाल ही में सेफ सिटीज प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी, लेकिन राज्यपाल कुंडी ने उन पर सुरक्षा जिम्मेदारियों की अनदेखी करते हुए विरोध-प्रदर्शनों के जरिए हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के संघीय सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने भी अफरीदी की आलोचना की है, खासकर आतंकवादियों द्वारा अफगान जमीन के इस्तेमाल पर सवाल उठाने को लेकर। यह संघीय और प्रांतीय सरकारों के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है, ऐसे समय में जब आतंकी हमलों में लगातार इजाफा हो रहा है।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने पेशावर, डेरा इस्माइल खान, बन्नू और लक्की मरवत में सेफ सिटीज पहल के क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय बैठकों की अध्यक्षता की। अधिकारियों के अनुसार, प्रमुख स्थानों पर निगरानी कैमरे लगाए गए हैं- पेशावर में 711, डेरा इस्माइल खान में 88, बन्नू में 76 और लक्की मरवत में 47 कैमरे स्थापित किए गए हैं।
उन्होंने इस योजना को चरणबद्ध तरीके से शेष क्षेत्रों और विलय किए गए जिलों जैसे टैंक, उत्तर वजीरिस्तान और करक तक विस्तार देने के निर्देश दिए। यह पहल निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, अपराध की रोकथाम और कमांड सेंटरों के जरिए पुलिस की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसे प्रांतीय स्थिरता की आधारशिला बताया जा रहा है।
हालांकि, राज्यपाल कुंडी ने इन प्रयासों को वास्तविक खतरों से ध्यान भटकाने वाला करार दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अफरीदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह प्रांत छोड़कर अन्य जगहों पर राजनीतिक रैलियों का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
पाकिस्तान स्थित स्वतंत्र पत्रकार शिनवारी, जिन्होंने अफगान डायस्पोरा नेटवर्क में रिपोर्ट लिखी, के अनुसार कुंडी ने रोजाना पुलिसकर्मियों, सैनिकों और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने टैंक जिले में पुलिस वाहन पर आईईडी हमले में सात पुलिसकर्मियों की मौत तथा डेरा इस्माइल खान और बन्नू में हमलों में बढ़ोतरी का विशेष उल्लेख किया।
कुंडी ने प्रांतीय सरकार से सैन्य अभियानों को फिर से तेज करने, पुलिस और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) की क्षमताएं बढ़ाने और विलय किए गए क्षेत्रों में लेवी बलों को प्रशिक्षित करने की मांग की। उन्होंने ड्रोन के जरिए विस्फोटक गिराए जाने की घटनाओं पर सवाल उठाते हुए, बिना शब्दों को तोड़े, इसके अफगान कनेक्शन की ओर इशारा किया।
राज्यपाल ने राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर संघीय संस्थानों के साथ एकजुट होने की अपील की और चेतावनी दी कि जब नेता सीमाओं की बजाय रैलियों को प्राथमिकता देते हैं, तो तालिबानीकरण को बढ़ावा मिलता है।
संघीय सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने अफरीदी की अफगान जमीन से जुड़े बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे बयान आतंकवादियों के नैरेटिव को मजबूती देते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अफरीदी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे संगठनों से पैदा हो रहे खतरे को कमतर आंक रहे हैं।
कुंडी ने खैबर पख्तूनख्वा को स्थिर करने के लिए संघीय और प्रांतीय सरकारों के बीच सहयोग की जरूरत पर जोर दिया और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार पर स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में विफल रहने का आरोप लगाया।
आतंकवाद से जुड़े आंकड़े संकट की गंभीरता को दर्शाते हैं। 2024 में खैबर पख्तूनख्वा में 702 आतंकी घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 1,363 लोगों की मौत हुई—इनमें 288 नागरिक, 421 सुरक्षाकर्मी और 654 आतंकवादी शामिल थे। यह संख्या 2023 के 941 मौतों की तुलना में 44.84 प्रतिशत अधिक है, जैसा कि अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट में बताया गया है।
2025 में हालात और बिगड़े, जब काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) ने 1,588 मामले, 500 से अधिक हमले और 510 पुलिस पर लक्षित हमलों को दर्ज किया। इस दौरान सुरक्षा बलों ने 420 आतंकवादियों को मार गिराया और 1,244 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इसके बावजूद बन्नू, डेरा इस्माइल खान, लक्की मरवत, हंगू और पेशावर जैसे जिले लगातार हमलों की चपेट में रहे, जिनमें से कई टीटीपी हमले अफगान सीमा के ठिकानों से जुड़े पाए गए।