नई दिल्ली, 5 फरवरी। अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिज पर चीन के दबदबा को कम करने के लिए एक नया दांव खेला है। अमेरिका ने करीब 50 से ज्यादा देशों के साथ मिलकर एक ऐसा मास्टर प्लान बनाया है, जिससे चीन के वर्चस्व से महत्वपूर्ण खनिज को सुरक्षित किया जा सके।
दरअसल, अमेरिका ने 4 फरवरी को लगभग 50 देशों के साथ मिलकर एक ट्रेडिंग ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह ट्रेडिंग ब्लॉक महत्वपूर्ण खनिज के उत्पादन, प्रोसेसिंग और कीमतों को स्थिर रखने के उद्देश्य से काम करेगा। यह कदम मिनरल्स पर चीन के एकाधिकार को खत्म करने के लिए उठाया जा रहा है।
भारत ने भी अमेरिका के इस मास्टर प्लान का समर्थन किया है। अमेरिका चाहता है कि लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की सप्लाई चेन को चीन के चंगुल से बाहर निकाला जाए। इसलिए अमेरिकी सरकार ने 50 से ज्यादा देशों का ब्लॉक बनाने का प्लान साझा किया है ताकि इन देशों के बीच आपस में बिना किसी परेशानी या रुकावट के खनिजों का व्यापार हो सके। इस ब्लॉक में शामिल देश कम से कम कीमत पर एक-दूसरे के साथ व्यापार कर सकेंगे।
चीन के पास दुनिया के लगभग 70 फीसदी रेयर अर्थ मिनरल्स और 90 फीसदी रिफाइनिंग का कंट्रोल है। इसके ऊपर चीन ने 2025 में रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर सख्त नियम लागू किए। ये नियम चीन ने दो चरणों में लागू किए, एक अप्रैल 2025 में और दूसरा अक्टूबर 2025 में।
ऐसे में अमेरिका चाहता है कि मिनरल्स को लेकर चीन का एकाधिकार खत्म किया जाए। वहीं, इस अहम बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए। उन्होंने सप्लाई चेन को संरचित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। 'क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल' सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी 'फोर्ज' नामक पहल के प्रति भारत का समर्थन जारी किया।
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "आज वाशिंगटन डीसी में 'क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल सम्मेलन' को संबोधित किया। अत्यधिक संकेंद्रण से जुड़ी चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं के जोखिम को कम करने के महत्व को रेखांकित किया।"
'क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल' बैठक के दौरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को मिलकर ऐसा ढांचा बनाना होगा, जिसमें टैरिफ और न्यूनतम कीमतों के जरिए घरेलू और मित्र देशों के उत्पादकों की रक्षा की जा सके।
उन्होंने कहा कि अमेरिका रेयर अर्थ और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सबसे कम कीमत तय करने पर विचार कर रहा है ताकि चीन जैसे देश कीमतें गिराकर संभावित प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर न कर सकें। हमें क्रिटिकल मिनरल्स की कीमतों को अधिक उम्मीद के मुताबिक और कम अनियमित बनाना होगा, तभी अमेरिका अपनी क्रिटिकल मिनरल्स इंडस्ट्री को दोबारा खड़ा कर सकता है। इसका उद्देश्य अमेरिकी उद्योग को आवश्यक खनिजों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और मित्र देशों में संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देना है। हमें क्रिटिकल मिनरल्स के लिए किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। हमें एक-दूसरे पर भरोसा करना होगा।