मुंबई, 5 फरवरी। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासित पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, जिसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने गुरुवार को ममता बनर्जी की तारीफ की।
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "ममता बनर्जी ने जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट में बहस की है, बड़े से बड़े वकील भी ऐसा नहीं कर सकते। उनके साहस को पूरा देश सलाम कर रहा है। सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर जो धांधलियां और त्रुटियां थी, उसे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। उसके बाद उन्होंने बताया कि अगर महामहिम हमारी बात नहीं सुनेंगे तो कौन सुनेगा।"
उन्होंने कहा, "अगर एक मुख्यमंत्री और इतने बड़े पद पर बैठी नेता ऐसी दलील दे सकती हैं, तो सभी को इससे सीखना चाहिए। सरकार कितनी भी मजबूत हो, वो कोर्ट से बड़ी नहीं होती। ममता बनर्जी ने कोर्ट में जिस प्रकार का साहस दिखाने का काम किया है, उससे केंद्र सरकार घबराई हुई है। देश में एसआईआर के नाम पर धांधली हो रही है। देश के सिर्फ 12 राज्यों में ही एसआईआर क्यों हो रहा है। देश में कुल 29 राज्य हैं, तो ऐसे में बाकी जगह एसआईआर क्यों नहीं हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि ममता बनर्जी ने जो दलील सुप्रीम कोर्ट में रखी है, उस पर कोर्ट न्याय करेगा और एसआईआर पर बहुत अच्छा फैसला देगा।"
आनंद दुबे ने केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच हुई हालिया बहस सिख समाज से नहीं जोड़ने की बात कही। उन्होंने, "दोनों बहुत पुराने मित्र हैं। 2009 में जब वह पहली बार सांसद बने तो राहुल गांधी ने ही उन्हें टिकट दिया था। इसके बाद वह 2014 और 2019 में जीते, वो तीन बार सांसद रहें। जबकि राहुल गांधी चार बार सांसद रहें।"
उन्होंने कहा, "दोनों में दोस्ती थी, ऐसे में जब दो दोस्त सामने आते हैं, तो मुस्कुराहट में एक कहता है कि आपने क्यों हमारे साथ गद्दारी की, क्यों हमें धोखा दिया, क्या हम इतने बुरे थे? इस चीज को सिख समाज से नहीं जोड़ना चाहिए। पूर्व में 2004 और 2009 में कांग्रेस पार्टी ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया था। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं, उन्हें जानबूझ कर बदनाम किया जा रहा है।"