न्यू स्टार्ट संधि खत्म, US-रूस पर परमाणु हथियारों की कोई लगाम नहीं! क्या बढ़ेगा वैश्विक परमाणु खतरा?

क्या है 'न्यू स्टार्ट' संधि? यूएस-रूस में समझौता खत्म होने से बढ़ा परमाणु हथियारों के प्रसार का खतरा


वॉशिंगटन, 5 फरवरी। अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट संधि गुरुवार को खत्म हो रही है। इसके साथ ही अमेरिका और रूस के बीच अब अपनी रणनीतिक न्यूक्लियर ताकतों को सीमित करने वाला कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता नहीं है।

इस संधि के खत्म होने के साथ ही दोनों देशों का अपने न्यूक्लियर हथियारों पर किसी संधि द्वारा नियंत्रण नहीं रहेगा। न्यू स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (न्यू एसटीएआरटी) पर 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके रूसी समकक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे।

इसके नियमों के तहत दोनों देशों ने स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर ताकतों को कम करने का वादा किया और नियमों को सत्यापित करने के लिए बड़े पैमाने पर ऑन-साइट निरीक्षण का रास्ता खोला था। दोनों देशों के बीच इस समझौते को औपचारिक रूप से सामरिक आक्रामक हथियार की कमी और लिमिटेशन के उपायों पर संधि के रूप में जाना जाता है। इस संधि ने दोनों पक्षों को 700 से ज्यादा मिसाइलों और बॉम्बर्स पर 1,550 से ज्यादा न्यूक्लियर वॉरहेड्स तक सीमित कर दिया, जो तैनात और इस्तेमाल के लिए तैयार हों।

पहले यह 2021 में खत्म होने वाला था, लेकिन इसे पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया था। फरवरी 2023 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इंस्पेक्शन में मॉस्को को हिस्सा लेने से रोक दिया था। पुतिन ने कहा कि क्रेमलिन ऐसे समय में अमेरिकियों को अपनी न्यूक्लियर साइट्स का निरीक्षण करने की इजाजत नहीं दे सकता जब वॉशिंगटन और उसके नाटो साथियों ने खुले तौर पर यूक्रेन में रूस की हार को अपना मकसद बताया है।

हालांकि, इसके बाद भी क्रेमलिन ने इस बात पर जोर दिया कि वह पूरी तरह से इस समझौते से पीछे नहीं हट रहा है और न्यूक्लियर हथियारों पर लगी सीमा का सम्मान करने का वादा किया था।

सितंबर 2025 में पुतिन ने फिर से ऐलान किया कि वे एक और साल के लिए न्यूक्लियर हथियारों की लिमिट का पालन करने के लिए तैयार हैं और वॉशिंगटन से भी ऐसा ही करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि न्यू स्टार्ट समझौते को खत्म होने देना अस्थिरता पैदा करेगा और इससे न्यूक्लियर हथियारों का फैलाव बढ़ सकता है।

हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी तनाव देखने को मिल रहा है। खासतौर से अब दो देशों के बीच किसी भी तरह के झड़प या तनाव के बीच परमाणु हमले की तुरंत धमकी दे दी जाती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस संधि के खत्म होने के साथ ही परमाणु हथियार के इस्तेमाल को लेकर लगाया गया लिमिटेशन भी हट जाएगा, जिससे न्यूक्लियर हमले का खतरा हमेशा बना रहेगा।

फरवरी 2026 में इस संधि के खत्म होने के साथ रूस और अमेरिका अब अपने परमाणु सामरिक कार्यक्रम को लेकर स्वतंत्र हैं। इससे नए हथियारों को लेकर एक नई होड़ की शुरुआत हो सकती है। विश्व पटल पर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने के लिए बेहतर से बेहतर हथियार बनाने की होड़ लगेगी, जो खतरनाक हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव भी ट्रीटी के समापन के समय को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर चुके हैं।
 

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