भोपाल, 5 फरवरी। मध्य प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर विभिन्न लोकों का निर्माण चल रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव का कहना है कि यह लोक सिर्फ ईंट-पत्थरों का निर्माण कार्य नहीं है बल्कि यह हमारे राज्य के विकास का ग्रोथ इंजन है।
राज्य के मुख्यमंत्री यादव ने कहा है कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक ‘लोक‘ केवल पत्थर और ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं, बल्कि ये मध्यप्रदेश के विकास के नए ग्रोथ इंजन सिद्ध होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के विजन को आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने आगे कहा, "हस्तशिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहां एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।"
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' को ध्येय वाक्य मानकर मध्य प्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जन-अभियान चलाए हुए है। प्रदेश में लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 लोकों का निर्माण किया जा रहा है। उज्जैन में महाकाल लोक बना। सागर में संत रविदास लोक 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इसी तरह सीहोर जिले के सलकनपुर में देवी लोक और ओरछा में श्री रामराजा लोक पूर्णता के करीब हैं।
मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर का कार्य पूर्ण हो चुका है। साथ ही भोपाल में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक, जानापाव में भगवान परशुराम लोक और महेश्वर में देवी अहिल्या संग्रहालय जैसे प्रकल्पों ने प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।